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Food Security: भारत में गेहूं का भंडार 16 साल के निचले स्तर पर

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पिछले 10 सालों में, 1 अप्रैल को औसत गेहूं भंडार 16.7 मिलियन मीट्रिक टन था।

Last Updated- April 19, 2024 | 4:28 PM IST
Wheat Procurement

पिछले दो सालों में कम फसल के कारण, सरकारी गोदामों में गेहूं का भंडार 16 सालों में सबसे कम हो गया है। बीते सालों के दौरान घरेलू सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को कम करने के लिए, भारत सरकार ने रिकॉर्ड मात्रा में गेहूं बेचा है।

आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल को सरकारी भंडार में गेहूं का भंडार केवल 7.5 मिलियन मीट्रिक टन रह गया था, जो पिछले साल के 8.35 मिलियन मीट्रिक टन से कम है। पिछले 10 सालों में, 1 अप्रैल को औसत गेहूं भंडार 16.7 मिलियन मीट्रिक टन था।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, सरकार ने पिछले साल गेहूं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रिकॉर्ड 10 मिलियन टन गेहूं बेचा, जिससे सरकारी गोदामों में गेहूं का स्टॉक कम हो गया है।

हालांकि स्टॉक कम होने के बावजूद, सरकार ने अभी तक गेहूं आयात पर लगने वाले 40% कर को कम नहीं किया है और न ही रूस जैसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं से सीधे गेहूं खरीदने का फैसला किया है। इसके बजाय, उन्होंने घरेलू बाजार में गेहूं की ऊंची कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकारी भंडार से ही बड़े खरीदारों (जैसे कि आटा मिलें और बिस्किट बनाने वाले) को गेहूं बेचा है।

एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में गेहूं बेचने के बाद भी सरकार के पास न्यूनतम जरूरत से ज्यादा गेहूं का स्टॉक मौजूद है और भविष्य में भी इसे 10 मिलियन टन से ऊपर रखने का लक्ष्य है।

सरकार को हर साल 1 अप्रैल तक अपने गोदामों में कम से कम 7.46 मिलियन टन गेहूं का स्टॉक रखना होता है। इस साल इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने किसानों से 30 से 32 मिलियन टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, पिछले दो सालों में गर्मी की वजह से कम फसल होने के कारण सरकार खरीद लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई थी।

इसके अलावा, रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से वैश्विक बाजार में गेहूं की कमी के बावजूद भारत ने 2022 में गेहूं निर्यात पर रोक लगा दी थी। एक व्यापारी का कहना है कि अगर इस साल भी सरकार खरीद लक्ष्य हासिल नहीं कर पाती है, तो आगामी आम चुनाव के बाद गेहूं आयात पर लगने वाले शुल्क को हटाया जा सकता है, ताकि आयात को बढ़ावा दिया जा सके।

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First Published - April 19, 2024 | 4:28 PM IST

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