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गर्मी की रात में भी ठंडे ही नहीं हो रहे भारत के महानगर, ताप सूचकांक मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक स्तर पर: CSE

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रात के समय ठंडक कम रहे तो मानव स्वास्थ्य पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है। लोगों को दिन की गर्मी से पैदा हुए तनाव से उबरने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है।

Last Updated- May 27, 2024 | 9:54 PM IST
Weather, Heat Wave

Heatwave in India: गर्मी के दिनों में देश के महानगरों में रात को भी ठंडक मयस्सर नहीं होती। इतना ही नहीं मॉनसून के दौरान लोगों को गर्मी की जबरदस्त चुभन झेलनी पड़ती है। देश के प्रमुख महानगरों के तापमान सूचकांक (HI) में 2010 के बाद से उससे एक दशक पहले के मुकाबले काफी बढ़ोतरी हुई है। शहरों में कंक्रीट के बेतहाशा निर्माण और ग्लोबल वार्मिंग के साथ-साथ हवा में बढ़ती नमी ने अत्यधिक आबादी वाले शहरी इलाकों का तापमान सूचकांक बढ़ा दिया है।

सेंटर ऑफ साइंस ऐंड एनवायरन्मेंट (CSE) की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2023 में देश में सतह पर हवा का औसत वार्षिक तापमान दीर्घकालिक औसत (1981-2003) के मुकाबले 0.65 डिग्री सेल्सियस अधिक था। इस रिपोर्ट में छह महानगरों के तापमान सूचकांकों का अध्ययन किया गया है, जिनमें दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलूरु और चेन्नई शामिल हैं। तापमान सूचकांक बताता है कि तापमान के साथ आर्द्रता यानी नमी को शामिल करने पर वास्तव में कितनी गर्मी महसूस होती है। माना जाता है कि 41 डिग्री सेल्सियस का ताप सूचकांक मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।

‘डीकोडिंग द अर्बन हीट स्ट्रेस अमंग इंडियन सिटीज’ नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर रात के दौरान उतने ठंडे नहीं हो रहे हैं, जितने 2001 से 2010 के दौरान होते थे। एक दशक के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि दिन में भूमि की सतह का जो तापमान होता था, रात में वह 6.2 से 13.2 डिग्री सेल्सियस तक कम हो जाता था। मगर पिछली 10 गर्मियों में यह 6.2 डिग्री सेल्सियस से 11.5 डिग्री सेल्सियस तक ही घटता है।

मुंबई में रात की ठंडक में सबसे ज्यादा 24 फीसदी की कमी आई है। रात के समय ठंडक कम रहे तो मानव स्वास्थ्य पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है। लोगों को दिन की गर्मी से पैदा हुए तनाव से उबरने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है।

रिपोर्ट में चीन, दक्षिण कोरिया, जापान, जर्मनी और अमेरिका के वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया है कि अत्यधिक गर्म रातों से मौत का खतरा करीब छह गुना बढ़ जाएगा।

इसके अलावा चौबीसों घंटे उच्च तापमान सूचकांक से बिजली की आपूर्ति पर भी बोझ बढ़ जाता है। एयर कंडीशनर (AC), कूलर और रेफ्रिजरेटर के अधिक उपयोग से बिजली का लोड बढ़ जाता है। कूलिंग उपकरणों के अधिक उपयोग से क्षेत्र विशेष में तापमान बढ़ जाता है।

कई शोध रिपोर्टों में कहा गया है कि एयर कंडीशनर के बढ़ते उपयोग से भी शहरों की हवा गर्म होती जा रही है। कई राज्यों में बिजली की मांग नए रिकॉर्ड बना चुकी है – दिल्ली (8 गीगावॉट), उत्तर प्रदेश (27 गीगावॉट) और महाराष्ट्र (28 गीगावॉट)।

CSE रिपोर्ट से एक और चिंता की बात दिखी है। इसके अनुसार दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में मॉनसून के दौरान ज्यादा गर्मी रही है और मॉनसून के पहले की अवधि की तुलना में ताप सूचकांक अधिक रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘2001 से 2010 के दौरान दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में मॉनसून के समय ताप सूचकांक चढ़ा था मगर दक्षिण भारत के महानगरों हैदराबाद, बेंगलूरु और चेन्नई में इसमें गिरावट आई थी। लेकिन पिछले 10 साल में मॉनसून के दौरान दिल्ली, मुंबई और कोलकाता ज्यादा गर्म हो गई तथा चेन्नई में मॉनसून के समय जो मामूली ठंडक रहती थी वह गायब हो गई।’

CSE में कार्यकारी निदेशक (रिसर्च ऐंड एडवोकेसी) अनुमिता रायचौधरी ने कहा कि शहरी इलाकों के लिए व्यापक ताप प्रबंधन योजना का जिक्र करते हुए कहा, ‘लोगों की सेहत सही रखने के लिए लू के थपेड़ों के दौरान आपातकालीन उपायों को लागू करने और हरे-भरे क्षेत्रों तथा जलाशयों का विस्तार, इमारतों में ताप से बचाव के उपाय, वाहनों, एयरकंडीशनर एवं उद्योगों के अपशिष्ट से निकलने वाले ताप घटाकर गर्मी कम करने के दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने की जरूरत है।’

पिछले महीने विश्व मौसम संगठन ने एशिया में जलवायु की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट में कहा था कि यह महाद्वीप वैश्विक औसत की तुलना में तेजी से गर्म हो रहा है और 1991 से 2023 के दौरान एशिया के गर्म होने की दर 1961 से 1990 की तुलना में करीब दोगुनी हो गई है।

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First Published - May 27, 2024 | 9:54 PM IST

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