facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

सघन चुनाव प्रचार से संकेत मिलता है कि Kejriwal गंभीर बीमारी से ग्रस्त नहीं हैं: अदालत

केजरीवाल को एक और झटका देते हुए अदालत ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में स्वास्थ्य के आधार पर अंतरिम जमानत की मांग संबंधी उनका आवेदन बुधवार को खारिज कर दिया।

Last Updated- June 06, 2024 | 4:26 PM IST
Delhi CM Kejriwal
Representative Image

दिल्ली की एक अदालत ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा है कि उन्होंने जिस तरह सघन (चुनाव) प्रचार किया एवं अन्य संबंधित गतिविधियों में भाग लिया, उससे संकेत मिलता है कि वह किसी गंभीर या ‘जानलेवा’ बीमारी से ग्रस्त नहीं हैं।

केजरीवाल को एक और झटका देते हुए अदालत ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में स्वास्थ्य के आधार पर अंतरिम जमानत की मांग संबंधी उनका आवेदन बुधवार को खारिज कर दिया।

विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने कहा, ‘‘अरविंद केजरीवाल ने जिस तरह सघन प्रचार किया तथा संबंधित बैठकें व कार्यक्रम किये, जैसा कि बहस के दौरान बताया गया, वे संकेत देते हैं कि वह किसी गंभीर या ‘जानलेवा’ बीमारी से ग्रस्त नहीं हैं, ऐसे में वह इस लाभ के हकदार नहीं हैं।’’

न्यायाधीश बावेजा ने केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 19 जून तक के लिए बढ़ा दी। अदालत इस मामले में वैधानिक जमानत की मांग संबंधी उनकी अर्जी पर सात जून को सुनवाई करेगी। अपने आदेश में न्यायाधीश ने कहा कि यह निर्धारित करने के लिए कि क्या उच्च कीटोन स्तर या वजन के कथित रूप से घटने से ‘मधुमेह कीटोएसिडोसिस’ हो सकता है, परीक्षण कराने की खातिर अंतरिम जमानत प्रदान करने का आधार ‘चिकित्सीय जरूरत से भी अधिक कमजोर है।’

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ प्रत्यक्ष तौर पर, जैसा कि आवेदक ने अनुमानित बीमारी की ‘नैदानिक जांच’ के लिए अंतरिम जमानत की मांग की है…. ऐसा कोई कारण जान नहीं पड़ता है कि हिरासत में रहने के दौरान आवेदक के परीक्षण क्यों नहीं कराये जा सकते हैं?’’

न्यायाधीश ने हालांकि तिहाड़ जेल प्रशासन को न्यायिक हिरासत के दौरान उनकी चिकित्सा जांचों का ध्यान रखने का निर्देश दिया। शनिवार को सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने यह कहते हुए आवेदन का विरोध किया था कि उन्होंने पूरे लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार किया लेकिन ‘अब जब आत्मसमर्पण करना है तो वह अचानक बीमार होने का दावा कर रहे हैं।’’

First Published - June 6, 2024 | 4:26 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट