facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने वाले जन विश्वास विधेयक को मंजूरी

रिपोर्ट को इस साल मार्च में अंतिम रूप दिया गया। उसी महीने उसे राज्यसभा और लोकसभा में पेश किया गया।

Last Updated- July 12, 2023 | 11:28 PM IST
Jan Vishwas Bill to decriminalize petty offenses and promote ease of doing business approved
Business Standard

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2023 को संभवत: मंजूरी दे दी है। इसमें कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 42 अधिनियमों के 183 प्रावधानों में संशोधन कर छोटी-मोटी गड़बड़ियों को अपराध की श्रेणी से हटाने का प्रस्ताव किया गया है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

इसमें 19 मंत्रालयों से जुड़े 42 अधिनियमों के 183 प्रावधानों में संशोधन करने का प्रस्ताव है। सूत्रों ने कहा कि यह विधेयक बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा के लिए आया। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले साल 22 दिसंबर को लोकसभा में जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक पेश किया था। इसके बाद विधेयक को विचार के लिए संसद की संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया। समिति ने विधायी और विधि मामलों के विभागों के साथ-साथ सभी 19 मंत्रालयों के साथ विस्तृत चर्चा की है।

रिपोर्ट को इस साल मार्च में अंतिम रूप दिया गया। उसी महीने उसे राज्यसभा और लोकसभा में पेश किया गया। संसदीय समिति ने केंद्र को कारोबार तथा जीवनयापन को सरल बनाने को बढ़ावा देने के लिए जन विश्वास विधेयक की तर्ज पर छोटे मामलों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया था।

समिति ने कहा था कि सरकार को पिछली तिथि से प्रावधानों में संशोधन करना चाहिए। इससे अदालतों में लंबित मामलों को निपटान में मदद मिलेगी। समिति ने यह भी सिफारिश की थी कि मुकदमों में वृद्धि से बचने के लिये जहां भी संभव हो कारावास के साथ जुर्माने को हटाकर नियम का उल्लंघन करने पर मौद्रिक दंड लगाया जाए।

विधेयक में छोटे-मोटे अपराधों को अपराधमुक्त करने के प्रस्ताव के अलावा अपराध की गंभीरता के आधार पर मौद्रिक दंड को तर्कसंगत बनाने, भरोसे पर आधारित राजकाज को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव किया गया है। जिन अधिनियमों में संशोधन किये जाने का प्रस्ताव है, उनमें औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940, सार्वजनिक ऋण अधिनियम, 1944, फार्मेसी अधिनियम, 1948, सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952, कॉपीराइट अधिनियम, 1957; पेटेंट अधिनियम, 1970, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 , मोटर वाहन अधिनियम, 1988, ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999, रेलवे अधिनियम, 1989, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, मनी लांड्रिंग निरोधक अधिनियम, 2002, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 आदि शामिल हैं। ये 42 कानून विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों से संबद्ध हैं। इन मंत्रालयों में वित्त, वित्तीय सेवाएं, कृषि, वाणिज्य, पर्यावरण, सड़क परिवहन और राजमार्ग, डाक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी शामिल हैं।

First Published - July 12, 2023 | 11:28 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट