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NEET को खत्म करने की मांग में कर्नाटक भी शामिल, राज्य की विधानसभा में प्रस्ताव पारित

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विधान सभा में पास किया प्रस्ताव, केंद्र से किया राज्य की परीक्षा (सीईटी) के आधार पर मेडिकल में दाखिले का अनुरोध

Last Updated- July 25, 2024 | 11:32 PM IST
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विवादों से घिरी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को खत्म करने की आवाज एक के बाद एक कई राज्यों से आ रही है। कर्नाटक विधान सभा में भी गुरुवार को इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया। नीट को रद्द करने के लिए प्रस्ताव पास करने वाले तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के बाद ऐसा करने वाला कर्नाटक तीसरा राज्य है।

कर्नाटक सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया है कि उसे कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) के नंबरों के आधार दाखिला देने की अनुमति दी जाए। सीईटी का आयोजन कर्नाटक सरकार करती है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ने भी अपने-अपने स्तर पर आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षाओं के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला देने की अनुमति केंद्र से मांगी है।

दोनों राज्यों ने नीट को खत्म करने की मांग की है। दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने भी मांग की है कि मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए नीट की व्यवस्था को खत्म कर पुरानी व्यवस्था ही लागू की जानी चाहिए।

नीट को स्वैच्छिक बनाने और राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में उनकी अपनी प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिला देने की छूट के संबंध में पूछे जाने पर एक सरकारी अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि एनएमसी अधिनियम और यूजीसी के दिशानिर्देशों के अनुसार नीट ही इकलौती और अनिवार्य परीक्षा है, जिसके आधार पर देशभर में मेडिकल कॉलेजों में दाखिला हो सकता है। इस संबंध में बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा शिक्षा मंत्रालय तथा नैशनल टेस्टिंग एजेंसी को भेजे गए सवालों का जवाब खबर छपने तक नहीं दिया गया था।

कर्नाटक सरकार ने ऐसे समय विधान सभा में नीट को खत्म करने और राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली सीईटी परीक्षा के तहत मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का प्रस्ताव पास किया है जब अखिल भारतीय स्तर पर होने वाले नीट में पेपर लीक समेत कई कथित धांधलियों को लेकर विवाद चल रहा है।

हालांकि उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि नीट-यूजी में पेपर लीक से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन पुन: परीक्षा के लिए यह जानना जरूरी है कि नीट का लीक हुआ पेपर क्या व्यापक स्तर पर छात्रों तक पहुंचा। नीट का आगाज 2010 में हुआ था। उसी समय से यह राज्यों के लिए विवाद की वजह बना हुआ है। दक्षिणी राज्य नीट को खत्म करने को लेकर अधिक मुखर रहे हैं।

विवाद की सबसे बड़ी जड़ राज्यों की मेडिकल परीक्षा और नीट के पाठ्यक्रम में अंतर होना है। राज्यों को लगता है कि एमबीबीएस और बीडीएस समेत मेडिकल में दाखिले के लिए देश में एक समान नीट परीक्षा होने से उनके छात्रों को नुकसान उठाना पड़ता है। तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों का मानना है कि नीट जैसी परीक्षा के जरिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की व्यवस्था से मेडिकल शिक्षा देने के लिए राज्यों की स्वायत्तता छीनने की कोशिश है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में कर्नाटक ऐसा राज्य है, जहां अकादमिक वर्ष 2023-24 में सबसे ज्यादा 11,745 मेडिकल सीट हैं। इनमें 3,750 सरकारी संस्थानों में हैं और शेष 7,995 प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में हैं।

इसके बाद तमिलनाडु का नंबर आता है, जहां कुल 11,650 सीट हैं। महाराष्ट्र में 10,845 और उत्तर प्रदेश में 9,908 सीट हैं। इसी प्रकार तेलंगाना में भी 8,490 सीट हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि कुल सीट का एक तिहाई से अधिक यानी 39 प्रतिशत दक्षिणी राज्यों में हैं, लेकिन सभी पर दाखिले नीट के जरिए ही होते हैं।

सीयूईटी-यूजी परीक्षा की अंतिम कुंजी जारी

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने गुरुवार को संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा-स्नातक (सीयूईटी-यूजी) की अंतिम कुंजी जारी कर दी। इसी के साथ स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए परिणाम घोषित करने का रास्ता साफ हो गया। एनटीए ने 7 जुलाई को सीईयूटी-यूजी 2024 की वैकल्पिक कुंजी जारी की थी जबकि करीब एक हजार विद्यार्थियों की शिकायत वाजिब होने पर उनकी दोबारा परीक्षा 19 जुलाई को ली गई। एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘अंतिम कुंजी जारी कर दी गई है और परिणाम जल्द घोषित किए जाएंगे।’

राष्ट्रीय प्रवेश सह पात्रता परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) सहित विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में कथित अनियमितता को लेकर जारी हंगामे की वजह से सीईयूटी-यूजी 2024 के परिणाम घोषित करने मे देरी हुई है। सीयूईटी के परिणाम पहले 30 जून को घोषित किए जाने थे लेकिन एनटीए ने नीट-यूजी, यूजीसी-नेट और सीआईएसआर-यूजीसी-नेट में कथित अनिमियतता एवं प्रश्नपत्र लीक के आरोपों की वजह से एनटीए ने नतीजे घोषित करने में देरी की।

सीयूईटी-यूजी के तहत 15 विषयों की परीक्षा कलम-कागज के माध्यम से हुई जबकि अन्य 48 विषयों के लिए परीक्षा कंप्यूटर माध्यम से हुई। इस साल 261 केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और निजी विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए परीक्षा के लिए 13.4 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है।

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First Published - July 25, 2024 | 11:14 PM IST

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