facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Meth Lab Busts in Greater Noida: ग्रेटर नोएडा क्यों बन रहा है ड्रग माफियाओं का अड्डा?

Advertisement

पुलिस सूत्रों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा का खाली पर बड़ा इलाका, कम आबादी और दिल्ली से नजदीकी इसे अवैध दवा बनाने की आदर्श जगह बनाती है।

Last Updated- April 23, 2024 | 3:56 PM IST
meth lab

ग्रेटर नोएडा, जिसे आमतौर पर मॉर्डन घरों और दफ्तरों के लिए जाना जाता है, पिछले साल से एक अलग ही वजह से सुर्खियों में बना हुआ है। यह वजह है विदेशियों द्वारा चलाए जा रहे मेथ लैब। हाल ही में 17 अप्रैल को हुई छापेमारी में, पुलिस ने 4 नाइजीरियाई नागरिकों को गिरफ्तार किया और 100 करोड़ रुपये मूल्य की 26 किलो ड्रग्स जब्त की।

चौंकाने वाली बात ये है कि ये अवैध गतिविधियां किराए के मकानों में चल रही थीं, जहां मेथम्फेटामाइन नामक खतरनाक ड्रग, जिसे आमतौर पर “मेथ” के नाम से जाना जाता है, बनाई जा रही थी। ये कोई इत्तेफाक नहीं है, पुलिस को शक है कि ये छापेमारी एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग गिरोह का बहुत छोटा हिस्सा है।

ग्रेटर में नोएडा में किस तरह का मेथ रैकेट चलाया जा रहा है?

पुलिस सूत्रों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा का खाली पर बड़ा इलाका, कम आबादी और दिल्ली से नजदीकी इसे अवैध दवा बनाने की आदर्श जगह बनाती है। पिछले साल ही मई में दो अलग-अलग छापेमारी में पुलिस ने 75 किलो से ज्यादा MDMA (एक्टस्टसी या मौली) पकड़ी थी। साथ ही करीब दर्जन भर विदेशियों को आवासीय इलाकों से गिरफ्तार किया गया था जहां मेथ बनाने की पूरी लैब बनाई गई थी।

इन छापों में मिली मेथ की कुल कीमत 350 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है। पुलिस को ये भी पता चला है कि असली मेथ को गिरोह के निचले स्तर पर काम करने वाले विदेशी बनाते थे। जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि ये मेथ फिर दिल्ली में किसी संपर्क में मौजूद व्यक्ति के पास जाती थी और वहां से यूरोप भेजी जानी थी। अब ये मेथ किस रास्ते से यूरोप भेजी जानी थी, रास्ते अभी पता नहीं चल पाए हैं।

Also Read: MDH, Everest row: भारत ने सिंगापुर, हांगकांग से मसाला उत्पादों पर रोक के मामले में जानकारी मांगी

कहां से मिलता है मेथ बनाने के लिए कच्चा माल?

कई पुलिस अफसरों ने इस बात की पुष्टि की है कि ग्रेटर नोएडा कम घनी आबादी वाले इलाकों और दिल्ली से आसान पहुंच होने के चलते दवा बनाने की आदर्श जगह बन गया है। एक अफसर के मुताबिक, तीनों मामलों में विदेशियों ने अकेली पड़ी जगहों पर मकान किराए पर ले रखे थे और इनमें कम से कम तीन तरफ खुला इलाका था। ताकि मेथ पकाने से निकलने वाली बदबू आसपास के लोगों को परेशान न करे।

ग्रेटर नोएडा में इस अवैध काम के लिए कच्चे माल की उपलब्धता है, जिसका विदेशों में मिलना मुश्किल होता है। मसलन, एफेड्रिन नाम की दवा जो सरकार और एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रतिबंधित है, ग्रेटर नोएडा में आसानी से मिल जाती है। हालांकि ये दवा इलाज के लिए इस्तेमाल होती है, लेकिन इसे पाने के लिए सख्त नियम हैं।

एक पुलिस अफसर ने ये भी बताया कि एफेड्रिन की सरकारी कीमत 80,000 से 90,000 रुपये प्रति किलो है, लेकिन काले बाजार में ये 2 से 3 लाख रुपये किलो मिलती है। यूरोप में तो इसे पाना भी मुश्किल है और वहां मिल भी जाए तो 8 से 10 लाख रुपये किलो तक पड़ती है। अफसर के शब्दों में “यहां मुनाफा दोगुना से भी ज्यादा है। ऊपर से मेथ, कोकीन के बाद दूसरी सबसे महंगी ड्रग है। ग्रेटर नोएडा में बनने वाली ये मेथ आसपास के लोगों के लिए नहीं बल्कि निर्यात के लिए बनाई जा रही थी।”

ड्रग भेजने के लिए किया जा रहा शॉपिंग ऐप का इस्तेमाल

विदेशी गिरोह कैसे एफेड्रिन खरीद रहे थे, इस पर अब भी जांच जारी है। हालिया छापेमारी में पुलिस को पता चला कि ड्रग सप्लायर पकाई हुई मेथ शिप करने के लिए कम जानी-मानी शॉपिंग ऐप इस्तेमाल कर रहे थे। उनके साथी, चाहे भारत में हों या विदेश में, किसी भी प्रोडक्ट का ऑर्डर देते थे और विदेशी लोकेशन को ही डिलीवरी एड्रेस बताते थे।

एक अफसर के मुताबिक, “एक बार मेथ दिल्ली पहुंचने के बाद, इसे जूतों के तलवों में छिपा दिया जाता था या बालों में लगाने वाले एक्सटेंशन के अंदर छिपाया जाता था। कभी-कभी तो बड़े पैमाने पर निर्यात किए जाने वाले कपड़ों की गड्डियों में भी इसे इस तरह से छिपाया जाता था कि पकड़ना मुश्किल हो जाए। हालांकि खुफिया जानकारी और अपने गुप्त सूत्रों की मदद से एजेंसियां ऐसे कई मामलों को नाकाम कर चुकी हैं।”

पुलिस सूत्रों के मुताबिक इन तीनों मामलों में गिरफ्तार सभी लोग फिलहाल जेल में हैं।

Advertisement
First Published - April 23, 2024 | 3:56 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement