facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Modi surname case: राहुल गांधी को उच्चतम न्यायालय से राहत

Advertisement

न्यायालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाई, राहुल की सांसदी बहाल होने का रास्ता साफ

Last Updated- August 04, 2023 | 10:58 PM IST
Rahul Gandhi returns to Parliament, Lok Sabha Secretariat issues notice of restoration of membership

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘मोदी उपनाम’ के बारे में की गई टिप्पणी के संबंध में 2019 में उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि मामले में उच्चतम न्यायालय ने उन्हें दोषी ठहराए जाने पर शुक्रवार को रोक लगा दी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कांग्रेस नेता को निचली अदालत ने दो साल की अधिकतम सजा सुनाई लेकिन दोषी ठहराते समय कोई कारण नहीं बताया। अदालत ने कहा कि यदि सजा एक दिन भी कम होती तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता था। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सार्वजनिक जीवन जीने वाले एक व्यक्ति के लिए इस तरह की टिप्पणी करना ठीक नहीं है।

कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष से यह मांग की थी कि राहुल की वायनाड से लोकसभा सदस्यता बहाल कर दी जाए ताकि वह संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा में हिस्सा ले सकें। संसद में मंगलवार से अविश्वास प्रस्ताव पर बहस शुरू होगी।

पार्टी ने कहा कि सूरत की एक निचली अदालत की ओर से राहुल को दोषी करार दिए जाने के 24 घंटे के भीतर ही अप्रत्याशित तेजी दिखाते हुए लोकसभा सचिवालय ने राहुल को निलंबित करने के आदेश दे दिए। सूरत की अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के एक दिन बाद ही लोकसभा सचिवालय ने राहुल की सदस्यता को अयोग्य करार दिया था और उन्हें एक महीने के भीतर ही आधिकारिक बंगला खाली करने के आदेश दिए गए।

उच्चतम न्यायालय में राहुल का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि लोकसभा सचिवालय को राहुल गांधी की सदस्यता जल्द से जल्द बहाल करनी चाहिए क्योंकि ऐसा न होने पर फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ सकता है।

विपक्षी दलों के गठबंधन, इंडियन नैशनल इन्क्लूसिव डेवलपमेंटल अलायंस (इंडिया) के नेताओं ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत किया, वहीं राहुल ने ट्वीट किया ‘चाहे जो कुछ भी हो, मेरा कर्तव्य समान ही रहेगा। भारत के विचार को सुरक्षित करना।’

Also read: Rahul Gandhi को अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ कांग्रेस करेगी देशव्यापी सत्याग्रह

बाद में कांग्रेस मुख्यालय पर राहुल ने लोगों के प्यार और समर्थन के धन्यवाद देते हुए कहा कि सच की हमेशा जीत होती है। उन्होंने कहा, ‘मेरा रास्ता हमेशा साफ है। मुझे यह स्पष्ट रूप से पता है कि मुझे क्या करना चाहिए।’

शुक्रवार को न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति संजय कुमार के पीठ ने कहा कि निचली अदालत के न्यायाधीश ने राहुल गांधी को दोषी ठहराते समय कोई कारण नहीं बताया सिवाय इसके कि उन्हें अवमानना मामले में शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी थी।

शीर्ष अदालत ने राफेल मामले के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उनकी ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी को गलत तरीके से बताने के लिए राहुल गांधी द्वारा बिना शर्त माफी के बाद उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही बंद करते हुए भविष्य में उन्हें और अधिक सावधान रहने की चेतावनी दी थी। अदालत गुजरात उच्च न्यायालय को चुनौती देने वाली राहुल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

पीठ ने कहा, ‘यदि सजा एक दिन कम होती, तो प्रावधान लागू नहीं होते, खासकर जब कोई अपराध गैर संज्ञेय, जमानती और समझौता योग्य हो। निचली अदालत के न्यायाधीश से कम से कम यह अपेक्षा थी कि वह अधिकतम सजा देने के लिए कुछ कारण बताते।’

शीर्ष अदालत ने कहा कि राहुल की दोषसिद्धि और उसके बाद संसद की सदस्यता से अयोग्य करार दिया जाने से न केवल सार्वजनिक जीवन में बने रहने का उनका अधिकार प्रभावित हुआ है बल्कि इससे मतदाताओं के अधिकार भी प्रभावित हुए हैं जिन्होंने उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना था।

Also read: राहुल ने किया ट्रक का सफर, सुनी ट्रक चालकों के ‘मन की बात’

जैसे ही सुनवाई शुरू हुई राहुल का पक्ष लेकर अदालत में मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ से कहा कि राहुल कोई अपराधी नहीं हैं और न ही किसी अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया है। उनका कहना था कि भाजपा के कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ कई मामले जरूर दर्ज कराए हैं।

सिंघवी ने बाद में कहा कि राहुल के खिलाफ करीब 13 मामले दर्ज कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि 21 महीने तक राहुल के कोलार भाषण के कोई दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके। उन्होंने कहा कि आखिरकार भाजपा के एक सदस्य गवाह बनकर अदालत में पेश हुए और उन्होंने दावा किया कि वह उस जनसभा में मौजूद थे जहां राहुल ने वह भाषण दिया था।

भाजपा के एक विधायक पूर्णेश मोदी ने राहुल की उस टिप्पणी के खिलाफ 2019 में आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था जिसमें उन्होंने कहा था, ‘सभी चोरों के उपनाम मोदी कैसे है?’यह टिप्पणी 13 अप्रैल 2019 को कर्नाटक के कोलार की एक चुनावी रैली के दौरान की गई थी।

Advertisement
First Published - August 4, 2023 | 10:58 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement