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NGT ने वाराणसी में गंगा की सहायक नदियों के बाढ़ क्षेत्र सीमांकन पर उप्र सरकार से रिपोर्ट मांगी

अपने हाल के आदेश में पीठ ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर संज्ञान लिया कि अस्सी घाट में दो करोड़ 80 लाख लीटर गैर शोधित अपशिष्ट जल प्रतिदिन छोड़ा जा रहा है।

Last Updated- March 02, 2024 | 1:39 PM IST
National Green Tribunal

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने वाराणसी में गंगा की सहायक नदियों-वरुणा और अस्सी के बाढ़ क्षेत्र सीमांकन के लिए उठाए गए कदमों पर उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट पेश करने को कहा है। हरित अधिकरण एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कहा गया था कि जिले में नगर निकाय ने नदी के डूब-क्षेत्र का सीमांकन नहीं किया है जिससे वहां लगातार अतिक्रमण हो रहा है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि नदियों में अवैध तरीके से नालों का गंदा पानी गिराया जा रहा है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने वाराणसी नगर निगम की एक रिपोर्ट का जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि 15 नालों से वरुणा में आंशिक या गैरशोधित जल गिराया जा रहा है जिससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

अपने हाल के आदेश में पीठ ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर संज्ञान लिया कि अस्सी घाट में दो करोड़ 80 लाख लीटर गैर शोधित अपशिष्ट जल प्रतिदिन छोड़ा जा रहा है। अधिकरण ने कहा, ‘‘संयुक्त सचिव, शहरी विकास ने 15 फरवरी 2024 को कार्रवाई रिपोर्ट पेश की है जिसमें वरुणा और अस्सी नदियों में गैर शोधित जल गिराए जाने के बारे में इसी प्रकार की बात कही गई है।’’

एनजीटी ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ‘‘लापरवाही बरते वाले प्राधिकारियों’’ के खिलाफ की गई कार्रवाई के संबंध में एक नयी रिपोर्ट पेश करने को कहा। मामले में अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।

First Published - March 2, 2024 | 1:39 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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