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Nirjala Ekadashi 2024: बिना पानी वाले व्रत के महत्व से लेकर पूजा विधि तक- जानिए सब कुछ इस व्रत के बारे में

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Nirjala Ekadashi 2024: पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष एकादशी 17 जून की सुबह 4:43 बजे से शुरू होकर 18 जून की सुबह 6:24 बजे तक चलेगी।

Last Updated- June 17, 2024 | 5:49 PM IST
Nirjala Ekadashi 2024

निर्जला एकादशी का अर्थ है “बिना जल”। यानी इस व्रत में न तो पानी पिया जाता है और न ही कोई भोजन ग्रहण किया जाता है। इसलिए इसे सभी एकादशी व्रतों में सबसे कठिन माना जाता है।

साल की 24 एकादशियों में से निर्जला एकादशी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष एकादशी 17 जून की सुबह 4:43 बजे से शुरू होकर 18 जून की सुबह 6:24 बजे तक चलेगी। निर्जला एकादशी का व्रत मंगलवार, 18 जून को रखा जाएगा।

निर्जला एकादशी का इतिहास – भीम से जुड़ी कथा!

निर्जला एकादशी को पांडव एकादशी, भीमसेनी एकादशी या भीम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है। पांडवों में सबसे बलशाली और खाने के बहुत शौकीन भीम, एकादशी का व्रत नहीं रख पाते थे।

बाकी पांडव और द्रौपदी तो व्रत करते थे, लेकिन भीम भूख सह नहीं पाते थे। अपनी इस कमजोरी से परेशान होकर और अनजाने में भगवान विष्णु का अपमान करने के डर से भीम महर्षि व्यास के पास समाधान ढूंढने गए।

महर्षि व्यास ने भीम को सलाह दी कि वो सालभर की सभी एकादशियों का व्रत पूरा करने के लिए सिर्फ एक निर्जला एकादशी का व्रत पूरे विधि-विधान से रखें। यही कारण है कि इस कथा के चलते निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है।

निर्जला एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म में हर महीने के दो पक्षों (शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष) में आने वाली एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। वैदिक ग्रंथों के अनुसार, हर एकादशी भगवान विष्णु के वैभव और ब्रह्मांड के संचालन में उनकी भूमिका का सम्मान करने का एक महत्वपूर्ण शुभ दिन माना जाता है।

निर्जला एकादशी की पूजा विधि

निर्जला एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठें। स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और पूजा के लिए एक चटाई या कपड़े का प्रयोग कर एक साफ स्थान बनाएं। भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए दीपक और अगरबत्ती जलाकर पूजा आरंभ करें।

भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने उन्हें प्रसन्न करने के लिए फूल, जल, तुलसी पत्र, फल, मिठाई आदि चढ़ाएं। श्रद्धाभाव से विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जैसे विष्णु मंत्रों का जाप करें।

पूजा के बाद, तुलसी के पौधे की पूजा करें, जिसे एकादशी पर पवित्र माना जाता है। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और फूल चढ़ाएं। निर्जला एकादशी का व्रत कठिन होता है क्योंकि इसमें पानी पीना भी वर्जित होता है। पूरे दिन और रात भर कुछ भी न खाएं या पिएं। रात में आरती करके पूजा संपन्न करें। अगले दिन सूर्यास्त के बाद ही व्रत तोड़ें, सात्विक आहार ग्रहण करें।

अगर किसी कारणवश अगले दिन व्रत तोड़ना संभव न हो, तो सिर्फ पानी पीकर यह संकेत दे दें कि व्रत खत्म हो गया है और फिर जब भी सुविधा हो भोजन ग्रहण कर सकते हैं। परंपरा अनुसार भोजन ग्रहण करने से पहले उसे भगवान विष्णु को प्रसाद के रूप में अर्पित करें।

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First Published - June 17, 2024 | 5:45 PM IST

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