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Official Secrets Act: पाकिस्तान के लिए जासूसी करता था ब्रह्मोस का पूर्व इंजीनियर, मिली उम्रकैद की सजा

BrahMos espionage case: निशांत अग्रवाल 14 साल की सख्त कैद भी भुगतनी होगी और साथ ही 3,000 रुपये का जुर्माना भी भरना होगा।

Last Updated- June 03, 2024 | 9:35 PM IST
Ex-BrahMos Engineer Nishant Agarwal
Ex-BrahMos Engineer Nishant Agarwal (Source/Facebook)

Nagpur की जिला अदालत ने सोमवार को ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व इंजीनियर निशांत अग्रवाल को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अग्रवाल को जासूसी के लिए ‘आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम’ (Official Secrets Act) के तहत सजा दी गई है। उन्हें 14 साल की सख्त कैद (rigorous imprisonment) भी भुगतनी होगी और साथ ही 3,000 रुपये का जुर्माना भी भरना होगा।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एमवी देशपांडे ने आदेश में बताया कि अग्रवाल को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 235 के तहत दोषी ठहराया गया था। उन पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(f) और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (OSA) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।

उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने लैपटॉप में मिसाइलों से जुड़ी गोपनीय जानकारी रखी थी, जो लीक हो गई। शक है कि पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों ने उन्हें फंसाने के लिए ‘हनीट्रैप’ का इस्तेमाल किया था। विशेष लोक अभियोजक ज्योति वाजानी ने बताया कि “अदालत ने अग्रवाल को आजीवन कारावास और 14 साल की सख्त कैद की सजा सुनाई है, साथ ही 3,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।”

कौन हैं निशांत अग्रवाल?

निशांत अग्रवाल, जो नागपुर में ब्रह्मोस एयरोस्पेस की मिसाइल केंद्र के टेक्निकल रिसर्च विभाग में काम करते थे, उन्हें 2018 में गिरफ्तार किया गया था। ये गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के मिलिट्री इंटेलिजेंस और आतंकवाद निरोधी दस्तों (ATS) के एक साथ किए गए अभियान में हुई थी।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के इस पूर्व इंजीनियर पर भारतीय दंड संहिता और कड़े आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (OSA) के तहत कई आरोप लगाए गए थे। कंपनी में चार साल काम करने के बाद, उन पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को मिसाइलों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक करने का आरोप लगाया गया था। ब्रह्मोस एयरोस्पेस भारत की रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस की मिलिट्री इंडस्ट्रियल कंसोर्टियम (NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया) का एक ज्वाइंट वेंचर है।

लगभग पांच साल जेल में रहने के बाद, पिछले साल अप्रैल में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने अग्रवाल को जमानत दे दी थी। हाईकोर्ट ने माना था कि मुकदमे में देरी, कानून के तहत आरोप कितना भी गंभीर क्यों न हो, अभियुक्त के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट के आदेश में कहा गया था कि मामले के निपटारे में अत्यधिक देरी संविधान के अनुच्छेद 21 को लागू करने का औचित्य साबित कर सकती है। अनुच्छेद 21 कहता है कि कानून में निर्धारित प्रक्रिया के बिना किसी व्यक्ति को जीवन या स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता है।

आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) क्या है?

भारत में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (OSA) एक ऐसा कानून है जो 1923 का है, इसे ब्रिटिश शासन के दौरान बनाया गया था और आजादी के बाद भी जारी रखा गया। ये कानून मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े राज्य के रहस्यों और आधिकारिक जानकारी की रक्षा के लिए बनाया गया है.

यह कानून जासूसी, देशद्रोह और गोपनीय जानकारी को बिना अनुमति बताने जैसे अपराधों को रोकता है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर जुर्माना या 14 साल तक की कैद या दोनों हो सकती है।

बीते कई सालों में, इस कानून की बहुत आलोचना हुई है। इसकी वजह है कि ये कानून बहुत व्यापक है और इसमें कई शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। उदाहरण के लिए, अधिनियम की धारा 5 सूचना छिपाने से संबंधित है, जिसपर सवाल उठता है कि क्या ये कानून पारदर्शिता और जवाबदेही के खिलाफ है?

इसके अलावा, सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत जानकारी देने के मामले में भी इस कानून को चुनौती दी गई है। ये कानून इतना सख्त है कि इसके तहत आरोपियों के लिए जमानत मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है, खासकर ऐसे मामलों में जहां राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल होता है।

First Published - June 3, 2024 | 9:35 PM IST

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