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PM मोदी ने दिखाई देश की पहली Under-River Metro को हरी झंडी, पूरा हुआ 53 साल का सपना

भारतीय रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि 2014 से 2023 तक कोलकाता और इसके आसपास के क्षेत्रों में इन मेट्रो परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 18,212 करोड़ रुपये का खर्च किया गया है

Last Updated- March 06, 2024 | 11:03 AM IST
underwater metro

देश को अपनी पहली अडंर-रिवर मेट्रो मिल गई है। आज यानी 6 मार्च को पीएम नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में भारत की पहली अंडर-रिवर मेट्रो सुरंग का उद्घाटन किया। यह अंडर रिवर मेट्रो कोलकाता की हुगली नदी के नीचे बनी है। ये सुरंग हावड़ा मैदान और एस्प्लेनेड को कनेक्ट करेगी।

बता दें कि हावड़ा मैदान और एस्प्लेनेड के बीच सुरंग की कुल लंबाई 4.8 किलोमीटर है। इसमें, 1.2 किमी सुरंग हुगली नदी में 30 मीटर नीचे है, जो इसे ‘किसी भी बड़ी नदी के नीचे देश की पहली परिवहन सुरंग’ बनाती है। इसके अलावा हुगली नदी के नीचे स्थापित हावड़ा मेट्रो स्टेशन, देश का सबसे गहराई में स्थित स्टेशन भी होगा। यह सुरंग ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर परियोजना का एक हिस्सा है।

इस कॉरिडोर में वर्तमान में साल्ट लेक सेक्टर पांच से सियालदह तक का हिस्सा व्यावसायिक रूप से परिचालन में है। मेट्रो रेल के मुताबिक, इस कॉरिडोर की पहचान 1971 में शहर के मास्टर प्लान में की गई थी।

53 साल पहले बना था प्लान

मेट्रो रेलवे के अनुसार, इस कॉरिडोर की पहचान 1971 में शहर के मास्टर प्लान में की गई थी। कोलकाता में भारत की पहली मेट्रो के अनुभव और दिल्ली मेट्रो नेटवर्क की सफलता ने पर्याप्त तकनीकी सहायता प्रदान की और योजनाकारों को जुलाई 2008 में इसे मंजूरी देने का रास्ता दिखाया।

“इस तरह ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के निर्माण की आकर्षक यात्रा शुरू हुई। यह लाइन हावड़ा और सियालदह रेलवे स्टेशनों को जोड़ती है, जो दुनिया के दो सबसे व्यस्त स्टेशन हैं, और हुगली नदी के नीचे से होकर गुजरती है, जो देश में इस तरह की पहली नदी है।” मेट्रो रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कौशिक मित्रा ने डेक्कन हेराल्ड से बातचीत में कहा।

बेहतर होगी कनेक्टिविटी

आगे उन्होंने कहा बताया कि, “हुगली, मिदनापुर और हावड़ा के साथ-साथ अन्य राज्यों के दूर-दराज के स्थानों से आने वाले लोगों को हावड़ा स्टेशन पर उतरने के बाद मेट्रो सेवाओं का लाभ उठाने से काफी फायदा होगा।”

भारतीय रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि 2014 से 2023 तक कोलकाता और इसके आसपास के क्षेत्रों में इन मेट्रो परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 18,212 करोड़ रुपये का खर्च किया गया है, जबकि इसकी स्थापना से वर्ष 2014 तक केवल 5,981 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

First Published - March 6, 2024 | 10:53 AM IST

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