facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

पश्चिमोत्तर भारत में कम हो सकती है बारिश, कुछ प्रमुख क्षेत्रों में ‘सामान्य’ मॉनसून की संभावना: IMD

Advertisement
Last Updated- May 26, 2023 | 10:32 PM IST
Monsoon 2026

मौसम विभाग ने आज जारी अपने दूसरे पूर्वानुमान में कहा है कि पश्चिमोत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों में इस साल जून से सितंबर के दौरान बारिश सामान्य से कम रहने के आसार हैं। विभाग ने यह भी कहा है कि बारिश पर निर्भर प्रमुख क्षेत्रों के साथ-साथ देश के शेष हिस्सों में मॉनसून सामान्य रहेगा। पश्चिमोत्तर भारत में अनाज का कटोरा कहलाने वाले पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य आते हैं। इसलिए देखना होगा कि इस क्षेत्र में कम वर्षा का कृषि उत्पादन पर कितना असर पड़ता है। इस क्षेत्र के अधिकतर हिस्से सिंचाई पर निर्भर हैं।

मौसम विभाग ने अप्रैल में जारी अपना पूर्वानुमान दोहराते हुए कहा है कि कुल मिलाकर इस साल मॉनसून सीजन में बारिश दीर्घाव​धि औसत (एलपीए) के 96 फीसदी पर सामान्य रहेगी। बारिश पूर्वानुमान से 4 फीसदी कम या ज्यादा रह सकती है। साल 1971 से 2020 के बीच जून से सितंबर की अव​धि में बारिश का एलपीए 87 सेंटीमीटर है। मौसम विभाग ने जून से सितंबर के दौरान सामान्य बारिश की संभावना को बढ़ाकर 43 फीसदी कर दिया है और सामान्य से अ​धिक बारिश की संभावना 11 फीसदी है। इसी प्रकार सामान्य से कम बारिश की संभावना 25 फीसदी और कम बारिश की संभावना 20 फीसदी है।

विभाग ने अप्रैल में जारी अपने पूर्वानुमान में कहा था कि सामान्य बारिश की संभावना 35 फीसदी है। विभाग ने यह भी कहा कि ‘मॉनसून अभिसरण क्षेत्र’ या भारत के वर्षा क्षेत्रों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून एलपीए का 96 से 106 फीसदी यानी सामान्य रहने की उम्मीद है। नीति निर्माताओं और किसानों के लिए यह राहत की खबर है क्योंकि इस क्षेत्र में खरीफ सीजन के दौरान बड़ी मात्रा में दलहन और तिलहन की खेती होती है।

Also read: वित्त वर्ष-24 में 7.5 फीसदी बढ़ेगी स्टील की डिमांड, GDP पर पड़ेगा असर: इंडियन स्टील एसोशिएसन

मौसम विभाग के वैज्ञानिक डीएस पई ने कहा, ‘द​क्षिण प्रायद्वीपीय भारत के अ​धिकांश हिस्सों, पूर्वी मध्य भारत के कुछ हिस्सों और पूर्वोत्तर एवं सुदूर उत्तर भारत में बारिश सामान्य अथवा सामान्य से अ​धिक होने के आसार हैं। मगर पश्चिमोत्तर भारत के अ​धिकांश हिस्सों, प​श्चिम मध्य भारत के समीपवर्ती क्षेत्रों, प्राद्वीपीय भारत के उत्तरी हिस्सों और हिमालय के तराई वाले क्षेत्रों में बारिश सामान्य अथवा सामान्य से कम रह सकती है।’विभाग ने कहा है कि 2023 के मॉनसून सीजन में अल नीलो विकसित होने की संभावना 90 फीसदी है। जून में देश भर में बारिश एलपीए के 92 फीसदी पर सामान्य से कम रह सकती है। साल 1971 से 2020 के बीच जून महीने का एलपीए यानी औसत बारिश का आंकड़ा 165.44 मिलीमीटर रहा है।

Advertisement
First Published - May 26, 2023 | 10:32 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement