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Sadhguru Case: सद्गुरु को SC से राहत, ईशा फाउंडेशन के खिलाफ जांच पर कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने ईशा फाउंडेशन के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट द्वारा जारी जांच आदेश पर रोक लगा दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 अक्टूबर को होगी।

Last Updated- October 03, 2024 | 1:40 PM IST
Sadhguru
Sadhguru Case

आध्यात्मिक नेता सद्गुरु जग्गी वासुदेव के नेतृत्व वाला प्रसिद्ध ईशा फाउंडेशन इन दिनों विवादों में घिरा हुआ है। हालांकि, आज सद्गुरु के इस फाउंडेशन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने फाउंडेशन के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट द्वारा जारी जांच आदेश पर रोक लगा दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 अक्टूबर को होगी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ईशा फाउंडेशन की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें फाउंडेशन ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। यह आदेश उस घटना के बाद दिया गया था, जब मंगलवार को कोयंबटूर स्थित फाउंडेशन के परिसर में सैकड़ों पुलिसकर्मी दाखिल हुए थे। पीठ में न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे।

ईशा फाउंडेशन ने इस कार्रवाई को लेकर अपनी चिंता जताई थी और इसे अनुचित बताया था। यह आदेश तब आया था जब सेवानिवृत्त प्रोफेसर एस. कमराज ने एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटियां गीता और लता को “ईशा योग केंद्र” में ब्रेनवॉश कर वहां रहने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि फाउंडेशन उनकी बेटियों को अपने परिवार से संपर्क नहीं करने दे रहा है।

कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने इस मामले को मद्रास हाईकोर्ट से अपने पास ट्रांसफर कर लिया है और तमिलनाडु पुलिस को निर्देश दिया है कि हाईकोर्ट द्वारा मांगी गई स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा करे। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए किसी भी तरह की आगे की कार्रवाई करने से रोक दिया। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “आप सेना या पुलिस को ऐसी जगह में दाखिल होने की अनुमति नहीं दे सकते।”
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता वर्चुअल रूप से या अपने वकील के माध्यम से उपस्थित हो सकते हैं। पुलिस जांच की स्थिति रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा की जाएगी। पुलिस, हाईकोर्ट के निर्देशों के आधार पर कोई अतिरिक्त कार्रवाई नहीं करेगी।

ईशा फाउंडेशन पर लगा बंधक बनाने का आरोप

कोर्ट ने दोनों महिलाओं से ब्योरा जानना चाहा जिनके पिता ने ईशा फाउंडेशन में अवैध रूप से बंधक बनाए जाने का आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। पीठ के न्यायाधीश मामले के तथ्यों के बारे में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए दोनों महिलाओं से निजी तौर पर बातचीत करने के लिए अपने कक्ष में गए।

उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर को डॉ. एस कामराज द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर अंतरिम आदेश पारित किया था, जिसमें उन्होंने पुलिस को निर्देश देने का अनुरोध किया था कि वह उनकी दो बेटियों को अदालत के समक्ष पेश करे, जिनके बारे में उनका आरोप है कि उन्हें ईशा फाउंडेशन के अंदर बंदी बनाकर रखा गया है और उन्हें रिहा किया जाए।

याचिकाकर्ता तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयंबटूर से सेवानिवृत्त प्रोफेसर थे। उनकी दो बेटियां हैं और दोनों ने इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर डिग्री ली है। दोनों ही ईशा फाउंडेशन से जुड़ी थीं। याचिकाकर्ता की शिकायत यह थी कि फाउंडेशन कुछ लोगों को गुमराह करके उनका धर्म परिवर्तन कर उन्हें ‘भिक्षु’ बना रहा है और उनके माता-पिता तथा रिश्तेदारों को उनसे मिलने भी नहीं दे रहा है।

आरोपों का किया खंडन

ईशा फाउंडेशन ने सभी आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि जिन दो महिलाओं की उम्र 42 और 39 साल है, वे स्वेच्छा से संस्थान के परिसर में रह रही थीं। इन दोनों महिलाओं को उच्च न्यायालय में पेश किया गया, जहां उन्होंने इस बात की पुष्टि की।

First Published - October 3, 2024 | 1:40 PM IST

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