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हिजाब पर पाबंदी लगाने वाले परिपत्र पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- छात्राओं के पास होनी चाहिए स्वतंत्रता

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पीठ ने कहा कि अगर कॉलेज का इरादा छात्राओं की धार्मिक आस्था के प्रदर्शन पर रोक लगाना था, तो उसने ‘तिलक’ और ‘बिंदी’ पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया।

Last Updated- August 09, 2024 | 10:54 PM IST
supreme court

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मुंबई के एक कॉलेज के उस परिपत्र पर आंशिक रूप से रोक लगा दी है, जिसमें कॉलेज परिसर में ‘हिजाब, बुर्का और नकाब’ पहनने पर पाबंदी लगाई गई है। न्यायालय ने इसके साथ ही यह भी कहा कि छात्राओं को यह चयन करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वह क्या पहनें। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि शैक्षिक संस्थान छात्राओं पर अपनी पसंद को नहीं थोप सकते।

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार के पीठ ने ‘एन जी आचार्य और डी के मराठे कॉलेज’ चलाने वाली ‘चेंबूर ट्रॉम्बे एजुकेशन सोसाइटी’ को नोटिस जारी किया और 18 नवंबर तक उसे जवाब तलब किया है।

पीठ ने मुस्लिम छात्रों के लिए ‘ड्रेस कोड’ को लेकर उत्पन्न नए विवाद के केंद्र में आए कॉलेज प्रशासन से कहा, ‘छात्राओं को यह चयन करने की आजादी होनी चाहिए कि वे क्या पहनें और कॉलेज उन पर दबाव नहीं डाल सकता, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपको अचानक पता चलता है कि देश में कई धर्म हैं।’

पीठ ने कहा कि अगर कॉलेज का इरादा छात्राओं की धार्मिक आस्था के प्रदर्शन पर रोक लगाना था, तो उसने ‘तिलक’ और ‘बिंदी’ पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया। न्यायालय ने एजुकेशनल सोसायटी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील माधवी दीवान से पूछा कि क्या छात्रों के नाम से उनकी धार्मिक पहचान उजागर नहीं होती? हालांकि, पीठ ने कहा कि छात्राओं को कक्षा के अंदर बुर्का पहनने की अनुमति नहीं दी जा सकती और न ही परिसर में किसी भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति दी जा सकती है।

नीट-पीजी स्थगित करने की याचिका खारिज

उच्चतम न्यायालय ने 11 अगस्त को होने वाली नीट-पीजी परीक्षा को स्थगित करने की मांग से संबंधित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। इसमें दावा किया गया था कि अभ्यर्थियों को ऐसे शहर आवंटित किए गए हैं, जहां पहुंचना उनके लिए बेहद असुविधाजनक है।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा के पीठ ने कहा कि वह पांच छात्रों के लिए दो लाख छात्रों के करियर को खतरे में नहीं डाल सकते। पीठ ने कहा, ‘हम ऐसी परीक्षा को कैसे स्थगित कर सकते हैं। श्री संजय हेगड़े, आजकल लोग बस परीक्षा स्थगित करने के लिए कहते हैं। यह एक आदर्श दुनिया नहीं है। हम अकादमिक विशेषज्ञ नहीं हैं।’

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (स्नातकोत्तर) (नीट-पीजी) को पुनर्निर्धारित करने की आवश्यकता है, क्योंकि एक परीक्षा सुबह और एक दोपहर बाद होनी है।

याचिका में कहा गया कि अनेक अभ्यर्थियों को ऐसे शहर आवंटित किए गए हैं, जहां पहुंचना उनके लिए बेहद असुविधाजनक है। इसमें कहा गया कि परीक्षा संबंधी शहर 31 जुलाई को आवंटित किए गए थे और विशिष्ट केंद्र 8 अगस्त को घोषित किए जाएंगे। यह परीक्षा पहले 23 जून को आयोजित होनी थी। कुछ अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे ‘एहतियाती उपाय’ के रूप में स्थगित कर दिया था।

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First Published - August 9, 2024 | 10:54 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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