facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

केंद्रीय कैबिनेट ने अंतरिक्ष क्षेत्र को दिया 1,000 करोड़ रुपये का फंड, 40 को फायदा होने की उम्मीद

Advertisement

फिलहाल भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का आकार 8.4 अरब डॉलर है और सरकार इसे साल 2033 तक 44 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखी है।

Last Updated- October 24, 2024 | 10:53 PM IST
Budget wishlist: Private space sector seeks GST exemptions निजी अंतरिक्ष फर्मों को सरकार से राहत की आस
Representative Image

केंद्रीय कैबिनेट ने गुरुवार को भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के तहत अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए 1 हजार करोड़ रुपये के उद्यम पूंजी कोष बनाने की मंजूरी दे दी। यह योजना कोष परिचालन शुरू होने की तिथि से पांच वर्ष तक के लिए बनाई गई है और इससे करीब 40 कंपनियों को लाभ होने की उम्मीद है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई में अपने बजट भाषण के दौरान इसकी घोषणा की थी, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को अगले 10 वर्षों में पांच गुना करने का लक्ष्य रखा गया था।

फिलहाल भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का आकार 8.4 अरब डॉलर है और सरकार इसे साल 2033 तक 44 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखी है। साल 2020 में सेक्टर सुधारों के नतीजतन निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से फिलहाल भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र में करीब 250 स्टार्टअप पंजीकृत हैं।

कोष के हिस्से के तौर पर प्रस्तावित निवेश की सांकेतिक सीमा करीब 10 से 60 करोड़ रुपये के बीच होगी और ये कंपनी के स्तर, इसकी वृद्धि और राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्षमताओं पर इसके संभावित प्रभाव पर निर्भर करेगी।

शुरुआती स्तर की कंपनी को 10 से 30 करोड़ रुपये मिलेंगे और अच्छी कंपनी को 30 से 60 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इस निवेश सीमा के आधार पर कोष से करीब 40 स्टार्टअप कंपनियों को मदद मिलने की उम्मीद है। निवेश अवसर और फंड की जरूरतों के आधार पर हर साल करीब 150 से 200 रुपये की रकम जारी की सकती है।

निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी स्काई रूट एरोस्पेस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी पवन कुमार चंदना ने कहा, ‘सरकार की यह पहल काफी सराहनीय है और इससे अंतरिक्ष परिवेश को काफी मजबूती मिलेगी। अंतरिक्ष क्षेत्र की कंपनियों के विस्तार के लिए पूंजी काफी जरूरी है और इस कोष से काफी मदद मिलेगी। इससे निजी निवेश भी आकर्षित होगा और उद्योग में दीर्घावधि की सफलता के लिए भविष्य का रास्ता भी तैयार होगा।’

स्काई रूट भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में सबसे ज्यादा रकम जुटाने वाली कंपनियों में से एक है। इसने नवंबर 2022 में प्रक्षेपण यान विक्रम-1 को सफलतापूर्वक तैयार कर संचालित किया और ऐसा करने वाली देश की पहली निजी कंपनी बन गई।

Advertisement
First Published - October 24, 2024 | 10:53 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement