facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

UP: बिक्री के लिए तैयार खड़े फ्लैट हुए जर्जर मगर नहीं मिले खरीददार

Advertisement
Last Updated- May 21, 2023 | 10:43 PM IST
Macrotech Developers
Creative Commons license

बड़ी तादाद में तैयार खड़े फ्लैटों की बिक्री न होने के चलते लखनऊ विकास प्राधिकरण ने नए निर्माण से तौबा कर लिया है। प्राधिकरण ने भविष्य में फ्लैट व मकान न बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रदेश सरकार की मंजूरी मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा।

लखनऊ विकास प्राधिकरण अब केवल गरीबों के लिए दुर्बल आय वर्ग (EWS) व प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत ही नए फ्लैट बनाएगा जबकि अन्य किसी श्रेणी में नए फ्लैट नहीं बनाएगा। इस आशय का प्रस्ताव प्राधिकरण ने प्रदेश सरकार के पास भेजा है। सरकार की मंजूरी मिलते ही इस फैसले को लागू कर दिया जाएगा।

प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से तैयार खड़े फ्लैटों की बिक्री न होने के चलते घाटा बढ़ता जा रहा है। एक दशक से भी ज्यादा पुराने बने कई बहुमंजिला इमारतों के फ्लैट जर्जर हालात में पहुंच गए हैं। इनकी बिक्री से पहले प्राधिकरण को मरम्मत पर खासी रकम खर्च करनी होगी।

फिलहाल राजधानी लखनऊ में ही विभिन्न आवासीय योजनाओं में लखनऊ विकास प्राधिकरण के 1,600 के लगभग फ्लैट बिना बिके खड़े हैं। प्राधिकरण ने इनकी बिक्री के लिए पहले आओ पहले पाओ, ऑन दि स्पॉट बिक्री से लेकर तमाम जुगत की पर ग्राहक नहीं मिले हैं। फ्लैटों की बिक्री के लिए प्राधिकरण ने इन पर GST माफ करने से लेकर कीमत घटाने के उपक्रम भी किए हैं। फिर भी फ्लैटों को खरीददार नहीं मिल पा रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि खाली फ्लैटों में से 500 के करीब तो जर्जर हो चुके हैं। इन्हें दोबारा से ठीक कराने के बाद ही बिक्री के लिए रखा जा सकता है। इसके अलावा खाली पड़े फ्लैटों के निर्माण में प्राधिकरण की 250 करोड़ रुपये के करीब पैसा फंसा हुआ है। विभिन्न सरकारी आवासीय संस्थाओं से कर्ज लेकर इन फ्लैटों का निर्माण प्राधिकरण ने करवाया था। अब इस कर्ज पर ब्याज के भुगतान का बोझ अलग से पड़ रहा है।

Also Read: यूपी सरकार ने नियुक्त किए 105 उद्यमी मित्र, ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी में मिलेगी मदद

अधिकारियों का यह भी कहना है कि इतनी बड़ी रकम फंस जाने के चलते नई योजनाओं में काम शुरू करने में भी दिक्कत आ रही है। आवास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लखनऊ, गाजियाबाद और कानपुर विकास प्राधिकरणों में सबसे ज्यादा दिक्कत तैयार फ्लैटों की बिक्री में आ रही है। इसका बड़ा कारण कीमतें ज्यादा होना और निजी विकासकर्ताओं से मिल रही प्रतिस्पर्धा है।

शासन से मंजूरी मिलने के बाद नई योजनाओं में केवल भूखंडों का आवंटन किया जाएगा। फ्लैटों के लिए ग्रुप हाउसिंग के तहत निजी विकासकर्ताओं को नीलामी के जरिए भूखंड दिया जाएगा। सबसे पहले इसकी शुरुआत प्राधिकरण की प्रस्तावित मोहान रोड योजना से की जाएगी।

Advertisement
First Published - May 21, 2023 | 10:43 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement