नए नियमों के मुताबिक, अब संपत्ति की बिक्री करने वाले की पहचान को खतौनी से सत्यापित किया जाएगा।
Yogi Cabinet Meeting: उत्तर प्रदेश में जमीनों की फर्जी तरीके से बिक्री पर रोकथाम लगाने के लिए नियमों को सख्त बनाया गया है। शहरी क्षेत्र में जमीन खरीदना मंहगा हो गया है। योगी सरकार ने प्रदेश के सभी गांवों से जिला मुख्यालय तक बस सेवा शुरू करने का फैसला लिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर कड़े नियमों को मंजूरी दी गई है। नए नियमों के मुताबिक, अब संपत्ति की बिक्री करने वाले की पहचान को खतौनी से सत्यापित किया जाएगा। स्टांप एवं निबंधन विभाग अब संपत्ति की बिक्री करने वाले का मालिकाना हक की जांच करेगा। बिना मालिकियत की जांच किए अब स्टांप एवं पंजीयन विभाग संपत्ति का रजिस्ट्रेशन नहीं करेगा।
बिना मालिकियत को जांच किए अब स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग रजिस्ट्रेशन नहीं करेगा। मंत्रिपरिषद में पारित एक प्रस्ताव के मुताबिक अब जमीन की खरीद-बिक्री में सर्किल रेट के आधार पर ही स्टांप शुल्क लगेगा। नगर निगम सीमा के भीतर जीमन खरीदने पर दो फीसदी का विकास शुल्क देना होगा। नए नियमों के मुताबिक अब प्रदेश के 18 शहरों में जमीन खरीदना मंहगा हो जाएगा।
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मंत्रिपरिषद के फैसलों की जानकारी देते हुए प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026 के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी है। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम सभाओं में बस सेवा शुरू की जाएगी। इस योजना को निजी क्षेत्र की मदद से संचालित किया जाएगा।
ग्राम परिवहन सेवा के संचालन के लिए हर जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन होगा। संभागीय परिवहन अधिकारी सहित अन्य अधिकारी इस समिति के सदस्य होंगे। प्रस्ताव के मुताबिक ग्राम परिवहन सेवा का संचालन करने वाले निजी बस ऑपरेटरों को कोई कर नहीं देना होगा। सेवा के तहत चलाई जाने वाली बसें रात के समय गांव में रुकेंगी और अगले दिन सुबह दस बजे बस जिला मुख्यालय पहुंचेंगी। इस सेवा के तहत सभी ड्राइवर – कंडक्टर स्थानीय रखे जायेंगे, ताकि रात में रुकने में सुविधा हो। इस योजना में प्राइवेट वाहनों को अनुबंधित किया जायेगा। अनुबंधित बस मालिक स्वयं अपने ड्राइवर – कंडक्टर रख सकेंगे।
ग्राम परिवहन सेवा में बसों का किराया सरकारी नियमों और जिला कमेटी के नियमों पर आधारित होगा। इस योजना से सभी गांवों को जिला मुख्यालय तक बस सेवा से जोड़ा जाएगा। एक अन्य फैसले में मंत्रिपरिषद ने ओला-ऊबर जैसी टैक्सी सेवाओं का प्रदेश में पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले के बाद अब ओला ऊबर आदि को अब परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। बिना रजिस्ट्रेशन, फिटनेस, मेडिकल, वेरिफिकेशन आदि के कोई ओला ऊबर आदि टैक्सी नहीं चलेगी। प्रदेश सरकार की ओर से एग्रीगेटर कंपनी को पांच लाख रुपए शुल्क देकर लाइसेंस दिया जायेगा। यह नियम तिपहिया ऑटो एवं टू-व्हीलर पर लागू नहीं होगा।
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मंत्रिपरिषद ने आवास विकास परिषद एवं विकास प्राधिकरणों के आवंटियों के भूखडों व भवनों की किश्तें समय पर न चुकाने पर लगने वाला दंड ब्याज माफ करने के लिए एक मुश्त समाधान (ओटीएस) योजना लागू करने का फैसला किया है। ओटीएस के तहत सभी बकाएदार आवंटियों से केवल साधारण ब्याज ही लिया जाएगा। ओटीएस के तहत आवेदन करने के लिए तीन महीने का समय दिया जाएगा जबकि प्रकरणों का निस्तारण अगले तीन महीनों में होगा।
एक अन्य प्रस्ताव में मंत्रिपरिषद ने मेरठ में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे इंटीग्रेटेड मैन्यूफैक्चरिंग एवं लॉजिस्टिक क्लस्टर (आईएमएलसी) के निर्माण के लिए 213.81 करोड़ रूपये स्वीकृत कर दिए हैं।