विश्वकर्मा पूजा, जिसे विश्वकर्मा जयंती या विश्वकर्मा दिवस भी कहा जाता है, भगवान विश्वकर्मा के सम्मान में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। भगवान विश्वकर्मा को दिव्य वास्तुकार और कारीगर माना जाता है। यह पर्व खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो निर्माण, इंजीनियरिंग, वास्तुकला, मैकेनिक और हस्तशिल्प जैसे व्यवसायों से जुड़े हैं।
विश्वकर्मा पूजा के दौरान भक्त भगवान विश्वकर्मा से बेहतर भविष्य, सुरक्षित वर्कप्लेस और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। इसके अलावा, वे अपने उपकरणों और मशीनों की सफल और अच्छे से काम करने के लिए भी आशीर्वाद मांगते हैं, ताकि उनका काम सफलतापूर्वक चलता रहे।
विश्वकर्मा पूजा 2024: तारीख और मुहूर्त
विश्वकर्मा जयंती बंगाली माह भाद्रपद के अंतिम दिन मनाई जाती है, जिसे भाद्र संक्रांति या कन्या संक्रांति भी कहा जाता है। 2024 में यह पर्व 16 सितंबर को मनाया जाएगा। द्रिक पंचांग के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा संक्रांति का शुभ मुहूर्त शाम 7:53 बजे होगा।
विश्वकर्मा जयंती का इतिहास
विश्वकर्मा जयंती की शुरुआत प्राचीन भारतीय शास्त्रों से मानी जाती है, जहां ऋग्वेद में इसके शुरुआती संदर्भ मिलते हैं। समय के साथ, यह त्योहार श्रमिकों, कारीगरों और कस्तकारों के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार बन गया, जिसमें वे भगवान विश्वकर्मा की पूजा कर समृद्धि, रचनात्मकता और कुशलता के आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं।
विश्वकर्मा पूजा का महत्व
विश्वकर्मा जयंती वास्तुकारों, श्रमिकों, बढ़ई, कारखाने के कर्मचारियों और मैकेनिकों के लिए विशेष पर्व है। इस दिन ये लोग अपनी मशीनों, कंप्यूटरों, वाहनों और अन्य उपकरणों की पूजा करते हैं और भगवान विश्वकर्मा से उनके काम में सफलता की प्रार्थना करते हैं। बहुत से लोग अपने वर्कप्लेस और कारखानों में पूजा का आयोजन करते हैं और इस दौरान अपने औजारों का उपयोग नहीं करते हैं।