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कच्चे तेल एवं पेट्रोल-डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स खत्म, तेल उत्पादकों को राहत

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अप्रत्याशित लाभ कर को विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) की श्रेणी में रखा गया था और उसे 1 जुलाई, 2022 से देसी कच्चे तेल पर लगाया गया था।

Last Updated- December 02, 2024 | 10:27 PM IST
India's fuel exports drop amid European Union sanctions, West Asia war

केंद्र सरकार ने सोमवार को देश में निकलने वाले कच्चे तेल और डीजल, पेट्रोल एवं विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाला अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) तत्काल खत्म कर दिया। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर कहा कि पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर सड़क एवं बुनियादी ढांचा उपकर (आरआईसी) को भी हटा दिया गया है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और घरेलू तेल उत्पादकों के मुनाफे में कमी को देखते हुए अप्रत्या​शित लाभ कर वापस लिया गया है। एक अधिकारी ने कहा, ‘मंत्रालय अप्रत्याशित लाभ कर पर पुनर्विचार का हिमायती थी ताकि सरकारी स्वामित्व वाली तेल उत्पादक कंपनियों को राहत दी जा सके। पिछली कुछ तिमाहियों में उनके शुद्ध मुनाफे में कमी आई है।’

वै​श्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत जून में 80 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई थी। उसके बाद लगभग हर महीने कीमतों में गिरावट आई है। ब्रेंट लास्ट डे फाइनैंशियल की कीमत 22 जुलाई के बाद महज दो बार 80 डॉलर के पार गई है। कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर मांग सुस्त रहने और आपूर्ति अधिक होने की चिंता से ऊपर-नीचे होती हैं। सोमवार को ब्रेंट क्रूड वायदा 72.6 डॉलर प्रति बैरल पर था।

अप्रत्याशित लाभ कर को विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) की श्रेणी में रखा गया था और उसे 1 जुलाई, 2022 से देसी कच्चे तेल पर लगाया गया था। इसे रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि से किसी कंपनी को होने वाले मुनाफे पर कर लगाने के इरादे से लागू किया गया था। मगर वै​श्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से इसका कोई मतलब नहीं रह गया।

निजी रिफाइनरियां देसी बाजार में ईंधन बेचने के बजाय विदेशी बाजारों से अ​धिक मुनाफा कमाने के चक्कर में न पड़ें, इसके लिए पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन के निर्यात पर भी यह कर लगाया जा रहा था। इसकी गणना रिफाइनरों के निर्यात मार्जिन अथवा घरेलू उत्पादन लागत और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच अंतर के आधार पर की गई थी। कर की दरों की समीक्षा हर पखवाड़े कच्चे तेल की औसत कीमतों के आधार पर की जाती थी। अधिकारी ने कहा कि 4 अप्रैल, 2023 के बाद दूसरी बार 18 सितंबर को अप्रत्या​शित लाभ कर की दरों को घटाकर शून्य किए जाने के बाद इसे खत्म करने की मांग तेज हो गई थी।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2023 से ही इस कर से केंद्र सरकार को कम सालाना राजस्व मिल रहा था। वित्त वर्ष 2025 में अप्रत्याशित लाभ कर से 6,000 करोड़ रुपये मिले। वित्त वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 13,000 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2023 में 25,000 करोड़ रुपये रहा था।

एक विश्लेषक ने कहा कि अप्रत्याशित लाभ कर से सरकार को प्राप्त राजस्व पेट्रोल एवं डीजल की बिक्री पर उत्पाद शुल्क से प्राप्त राजस्व जैसा अहम या ज्यादा नहीं होता है।

विश्लेषकों ने कहा कि इस पहल से तेल उत्पादक कंपनियों के कर बोझ पर भी कोई खास असर पड़ता नहीं दिखता। इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग) प्रशांत वशिष्ठ ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘हाल के महीनों में तेल कंपनियों पर अप्रत्याशित लाभ कर का प्रभाव सीमित रहा है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें 70 से 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही हैं।’

जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी का संचालन करने वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर आज 1.42 फीसदी बढ़त के साथ 1,310 रुपये पर बंद हुआ। ओएनजीसी का शेयर 0.37 फीसदी बढ़कर 257.65 रुपये पर बंद हुआ मगर ऑयल इंडिया का शेयर 2.49 फीसदी गिरावट के साथ 478.4 रुपये पर बंद हुआ।

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First Published - December 2, 2024 | 10:27 PM IST

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