लाहौर उच्च न्यायालय ने तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पांच साल की अयोग्यता को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर शुक्रवार को पाकिस्तान के शीर्ष चुनाव निकाय को नोटिस जारी किया। अयोग्य घोषित किए जाने के कारण खान फरवरी में होने वाला आम चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
पांच सदस्यीय पीठ ने यह भी कहा कि वह औपचारिक रूप से सुनवाई से पहले इस बात पर फैसला करेगी कि याचिका इस अदालत में सुनवाई योग्य है या नहीं। हालांकि पाकिस्तान निर्वाचन आयोग (ईसीपी) का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील के अनुपस्थित रहने के कारण पीठ ने सुनवाई स्थगित कर दी और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया।
ईसीपी ने आठ अगस्त को 71 वर्षीय खान को अयोग्य घोषित कर दिया था जो प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान प्राप्त उपहारों का विवरण छिपाने के आरोप में तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वर्तमान में रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं।
खान चाहते हैं कि उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई की जाए क्योंकि वह आम चुनाव में भाग लेना चाहते हैं, जिसकी तारीख ईसीपी ने आठ फरवरी घोषित की है।
इससे पहले इस्लामाबाद की एक निचली अदालत ने उन्हें ‘‘जानबूझकर और सोच समझकर राष्ट्रीय खजाने से अर्जित लाभ को छिपाकर भ्रष्ट आचरण’’ में लिप्त रहने का दोषी पाया था। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने 29 अगस्त को मामले में खान की सजा को निलंबित कर दिया था।
‘डॉन डॉट कॉम’ की खबर के अनुसार, ‘‘इस महीने की शुरुआत में दायर एक याचिका में पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि ईसीपी ने तोशाखाना उपहारों के संबंध में उनके स्पष्ट स्पष्टीकरण के बावजूद उन्हें मियांवाली के एनए-95 निर्वाचन क्षेत्र से नेशनल असेंबली के सदस्य के रूप में अवैध रूप से पद से हटा दिया और निर्देश दिया कि उनके खिलाफ निर्वाचन अधिनियम 2017 के तहत शिकायत दर्ज की जाए।’’
खान 2018 में पंजाब प्रांत के मियांवाली से नेशनल असेंबली के लिए चुने गए थे। उन्होंने अपनी अयोग्यता को गैरकानूनी बताते हुए अदालत से इसे रद्द करने का भी अनुरोध किया, ताकि वह आगामी आम चुनाव लड़ सकें।