facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

भारत को COP28 में अपनी गति बरकरार रखने की आवश्यकता है : UNDP भारत प्रमुख

Advertisement

यहां वैश्विक जलवायु वार्ता में 198 देशों के 1,00,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया। (यह खबर ‘2023 क्लाइमेट चेंज मीडिया पार्टनरशिप’ के तहत तैयार की गई है

Last Updated- December 05, 2023 | 1:26 PM IST
cop28

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) भारत के जलवायु प्रमुख डॉ. आशीष चतुर्वेदी ने कहा कि भारत को वैश्विक जलवायु कार्रवाई की दिशा में यहां संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (यूएन सीओपी28) में अपनी गति और पैरवी के प्रयासों को जारी रखने तथा विकसित देशों से अधिक प्रतिबद्धता और वित्त पोषण की मांग करने की आवश्यकता है। दुबई में संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता की शुरुआत शानदार तरीके से हुई, जिसमें देशों ने जलवायु संकट में बहुत कम योगदान देने के बावजूद इसका सबसे ज्यादा खमियाजा भुगत रहे विकासशील और कमजोर देशों को मुआवजा देने के बारे में एक प्रारंभिक समझौता किया। सीओपी28 के पहले दिन हानि और क्षति कोष के संचालन पर समझौते ने अगले 12 दिनों में और अधिक महत्वाकांक्षी निर्णयों के लिए मंच तैयार किया।

‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम में जलवायु और पर्यावरण कार्रवाई प्रमुख डॉ. आशीष चतुर्वेदी ने वैश्विक अनुकूलन प्रयासों में योगदान जारी रखने की भारत की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘हानि और क्षति कोष काफी हद तक भारत के लिए भी एक जीत है। हमने अनुकूलन प्रयासों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।’’ डॉ. चतुर्वेदी ने हानि और क्षति कोष की पैरवी पर और जोर देते हुए कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमें हानि और क्षति पर आगे बढ़ने के लिए और अधिक प्रयास करने की जरूरत है। हानि और क्षति सुविधा कहां होगी? क्या यह अमीर और शक्तिशाली देश वाले क्षेत्र ग्लोबल नॉर्थ में होगी?

क्या यह ग्लोबल साउथ में हो सकती है?’’ ‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत को सीओपी28 में अपनी गति तथा पैरवी प्रयासों को जारी रखने तथा विकसित देशों से अधिक प्रतिबद्धता और वित्त पोषण मांगने की आवश्यकता होगी।’’ यूएनडीपी के राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रयासों पर डॉ. चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘हम नीति पर, राष्ट्रीय स्तर पर अनुकूलन पर काम करते हैं, भारत के अनुकूलन संचार पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ हम निकटता से काम कर रहे हैं।’’ उन्होंने अनुकूलन परियोजनाओं और वृहद जलवायु वार्ताओं दोनों में भारत के सकारात्मक योगदानों और नेतृत्व का जिक्र किया।

यहां वैश्विक जलवायु वार्ता में 198 देशों के 1,00,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया। (यह खबर ‘2023 क्लाइमेट चेंज मीडिया पार्टनरशिप’ के तहत तैयार की गई है जो ‘इंटरन्यूज अर्थ जर्नलिज्म नेटवर्क’ और ‘स्टैनली सेंटर फॉर पीस एंड सिक्योरिटी’ द्वारा आयोजित एक पत्रकारिता फेलोशिप है।)

Advertisement
First Published - December 5, 2023 | 12:56 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement