ईरान के राजनीतिक मामलों के उप विदेश मंत्री ने मॉस्को में फलस्तीनी गुट हमास के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी ‘तास’ ने शुक्रवार को यह खबर दी।‘तास’ के मुताबिक, ईरान ने गुरुवार को हुई बैठक में गाजा में संघर्ष विराम और मानवीय सहायता पहुंचाने पर चर्चा की। ईरान और हमास के प्रतिनिधियों के बीच हुई इस बैठक को लेकर इजराइल की ओर से निंदा किए जाने की संभावना है।
इजराइल के विदेश मंत्रालय ने पहले ही हमास के प्रतिनिधियों को मॉस्को आमंत्रित करने के रूस के कदम की आलोचना की है। मंत्रालय ने रूस के कदम को ‘‘आतंकवाद का समर्थन करने वाला कृत्य’’ करार दिया और हमास के प्रतिनिधियों को रूस से निष्कासित करने की मांग की। इजराइल की आलोचना पर क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मॉस्को सभी पक्षों से आवश्यक संपर्क बनाए रखने में विश्वास करता है। हालांकि, अब तक स्पष्ट नहीं है कि बृहस्पतिवार को रूस, ईरान और हमास के प्रतिनिधियों ने एक साथ बैठक की या नहीं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दमित्रि पेस्कोव ने कहा कि बैठक के दौरान क्रेमलिन का हमास के साथ कोई संपर्क नहीं था।
‘तास’ की खबर के मुताबिक, ईरान के उप विदेशमंत्री अली बाघेरी कानी ने हमास के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे अबू मरजोउक से कहा कि तेहरान की बातचीत में ‘प्राथमिकता गाजा में तत्काल संघर्ष विराम, लोगों को राहत पहुंचाना और दमनकारी घेराबंदी को समाप्त करना है।’’
कानी ने गुरुवार को ही रूस के उप विदेशमंत्री मिखाइल बोगदानोव से भी मुलाकात की जिन्हें क्रेमलिन ने पश्चिम एशिया के लिए अपना दूत नियुक्त किया है।
रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उनकी बातचीत के केंद्र में गाजा में युद्ध को रोकना और फलस्तीनियों को मानवीय सहायता पहुंचाने का मुद्दा था। बोगदानोव ने अलग से हमास के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की और गाजा में बंधक बनाकर रखे गए लोगों और इलाके में फंसे विदेशियों की निकासी के मुद्दों पर चर्चा की।