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LGBTQ+ Rights: थाइलैंड में निचले सदन में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने वाला विधेयक पारित

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प्रतिनिधि सभा में उपस्थित 415 सदस्यों में से 400 ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया, वहीं 10 लोगों ने इसके खिलाफ मतदान किया।

Last Updated- March 27, 2024 | 10:20 PM IST
People flee following shots fired at the luxury Siam Paragon shopping mall, in Bangkok

थाइलैंड की संसद के निचले सदन ने बुधवार को एक विवाह समानता विधेयक को भारी बहुमत से पारित कर दिया जिसमें समलैंगिक विवाह समेत किसी भी लैंगिक पहचान के लोगों के बीच विवाह संबंधों को मान्यता दी गई है। इस विधेयक के कानून बनने के साथ थाइलैंड किसी भी लैंगिक पहचान वाले जीवनसाथियों के समानता के अधिकार को कानूनी मान्यता देने वाला दक्षिण पूर्व एशिया का पहला देश बन जाएगा।

प्रतिनिधि सभा में उपस्थित 415 सदस्यों में से 400 ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया, वहीं 10 लोगों ने इसके खिलाफ मतदान किया। पांच सदस्यों ने मतदान से दूरी बनाई या उसमें भाग नहीं लिया। विधेयक में नागरिक और व्यावसायिक संहिता में संशोधन कर ‘पुरुषों और महिलाओं’ तथा ‘पति और पत्नी’ शब्दों की जगह ‘लोग’ और ‘वैवाहिक जीवनसाथी’ शब्द डाले गए हैं।

यह विधेयक ‘एलजीबीटीक्यू प्लस’ दंपतियों को पूरी तरह कानूनी, वित्तीय और चिकित्सा अधिकार प्रदान करेगा। विधेयक अब सीनेट में जाएगा, जो निचले सदन से पारित होने वाले किसी भी विधेयक को बमुश्किल ही कभी खारिज करता है। इसके बाद विधेयक को थाइलैंड के नरेश की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

इसके कानून बनने के बाद थाइलैंड दक्षिण पूर्व एशिया का पहला और एशिया में ताइवान तथा नेपाल के बाद तीसरा ऐसा देश बन जाएगा जहां इस तरह का कानून पारित हुआ है। सत्ताधारी फिऊ थाई पार्टी के प्रवक्ता और विवाह समानता विधेयक की निगरानी समिति के अध्यक्ष दानुफॉर्न पुन्नकांता ने संसद में कहा कि संशोधन ‘थाइलैंड में हर किसी के लिए’ है चाहे उनकी लैंगिक पहचान कोई भी हो और यह विषमलैंगिक जोड़ों को भी किसी तरह के अधिकार से वंचित नहीं करेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘इस कानून के माध्यम से हम (एलजीबीटीक्यू प्लस समूह के) अधिकार लौटाएंगे। हम उन्हें अधिकार दे नहीं रहे। ये तो मौलिक अधिकार हैं जो इस समूह के लोगों ने गंवा दिए थे।’’ हालांकि सांसदों ने कानून में ‘फादर एंड मदर’ (माता पिता) की जगह ‘पेरेंट’ शब्द को शामिल किए जाने की मंजूरी नहीं दी। समलैंगिक अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे कुछ ‘एलजीबीटीक्यू प्लस’ दंपतियों के परिवार बनाने और संतान पैदा करने के अधिकार सीमित हो जाएंगे।

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First Published - March 27, 2024 | 10:20 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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