अमेरिका-भारत ऊर्जा भंडारण कार्यबल सोमवार से परिचालन में आ गया। सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत गठित कार्यबल का मकसद अमेरिका और भारत में ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकी को गति देना है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अमेरिकी ऊर्जा मंत्री जेनिफर ग्रानहोम के बीच आयोजित अमेरिका-भारत रणनीतिक स्वच्छ ऊर्जा भागीदारी (एससीईपी) की मंत्रिस्तरीय बैठक में पहली बार अमेरिका-भारत ऊर्जा भंडारण कार्यबल की घोषणा अक्टूबर, 2022 में की गई थी।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत गठित ऊर्जा भंडारण कार्यबल (ईएसटीएफ) की स्थापना अमेरिकी ऊर्जा विभाग (डीओई) और बिजली मंत्रालय ने की है। भारत में उन्नत ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन और ई-वाहन प्रौद्योगिकियों के विकास पर केंद्रित उद्योग संगठन इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस (आईएसए) सचिवालय सेवाएं मुहैया कराएगा।
अमेरिका-भारत ऊर्जा भंडारण कार्यबल का लक्ष्य ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों बढ़ावा देना है। इसके लिए कार्यबल अमेरिकी और भारत सरकार के अधिकारियों, उद्योग प्रतिनिधियों तथा अन्य संबद्ध पक्षों के बीच जारी सार्थक बातचीत की सुविधा प्रदान करेगा।
कार्यबल ऊर्जा क्षेत्र को कार्बन उत्सर्जन से मुक्त करने को दोनों देशों के बीच रणनीतिक स्वच्छ ऊर्जा भागीदारी को बढ़ावा देने के लक्ष्य के साथ काम करेगा। इसमें स्वच्छ ऊर्जा का विकास और उसका उपयोग शामिल है।
भारत की तरफ से कार्यबल की सह-अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के सचिव राकेश कुमार करेंगे। कुमार ने कहा, ‘‘अमेरिका-भारत ऊर्जा भंडारण कार्यबल…से भारत को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बदलाव और 2070 तक शुद्ध रूप से शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।’’