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असैन्य परमाणु करार पर काम जारी, अमेरिकी NSA जेक सलिवन से मिले विदेश मंत्री एस जयशंकर

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सलिवन ने कहा कि भारत के निजी क्षेत्र का अमेरिका में निवेश हाल ही में चीन के निवेश को पीछे छोड़ चुका है और उसने वहां चार लाख रोजगार तैयार करने में मदद की है।

Last Updated- January 06, 2025 | 11:32 PM IST
Work continues on civil nuclear agreement, External Affairs Minister S Jaishankar meets US National Security Advisor Jake Sullivan असैन्य परमाणु करार पर काम जारी, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सलिवन से मिले विदेश मंत्री एस जयशंकर

India-US nuclear deal: अमेरिका लंबे समय से चले आ रहे उन नियमों को समाप्त करने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है जो भारतीय परमाणु संस्थानों और अमेरिकी कंपनियों के बीच असैन्य परमाणु सहयोग को रोकते रहे हैं। यह जानकारी अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जेक सलिवन ने सोमवार को दी। अगर ऐसा होता है तो भारत के लिए उन संवेदनशील अमेरिकी परमाणु तकनीक को पाना आसान हो जाएगा जिन्हें अमेरिका ने अब तक अपने पास ही रखा है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली में इनीशिएटिव ऑन क्रिटिकल ऐंड एमर्जिंग टेक्नॉलजीज (आईसीईटी) के क्षेत्र में भारत-अमेरिका रिश्तों पर टिप्पणी करते हुए सलिवन ने कहा कि असैन्य परमाणु साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए कागजी कार्रवाई जल्द पूरी कर ली जाएगी।

2007 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति रहे जॉर्ज बुश के बीच हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते का जिक्र करते हुए निवर्तमान एनएसए ने कहा कि दोनों देशों को ‘अभी इसे पूरी तरह हकीकत में बदलना है।’

इस ऐतिहासिक समझौते की बदौलत भारत को यह अवसर मिला कि वह अमेरिका से दोहरे इस्तेमाल वाली परमाणु तकनीक खरीद सके। इसमें प्लूटोनियम के प्रसंस्करण और यूरेनियम का संवर्धन करने वाले पदार्थ और उपकरण शामिल हैं। इसने भारत को इस काबिल बनाया कि वह अन्य देशों से असैन्य परमाणु ईंधन और तकनीक खरीद सके।

परंतु अमेरिकी थिंक टैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनैशनल पीस के मुताबिक भारत को अपनी लिखित प्रतिबद्धताओं के अनुरूप अमेरिका से परमाणु रिएक्टर खरीदने के मार्ग की बाधाओं को दूर करने में पहले ही काफी विलंब हो चुका है। इस बीच अमेरिका भी परमाणु अप्रसार संधि में शामिल नहीं होने के भारत के रुख से चिंतित है।

सलिवन ने कहा, ‘यह एक अवसर होगा कि हम अतीत के कुछ टकरावों से आगे बढ़ें और उन संस्थाओं के लिए बाहर निकलने की राह बनाएं जो अमेरिका की प्रतिबंधित सूची में रही हैं।’ उन्होंने कहा कि यह इसलिए संभव हो सका क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हुए हैं और इस मुद्दे पर सरकारों ने भी खुलापन दिखाया है।

सलिवन ने यह टिप्पणी विदेश मंत्री एस जयशंकर से मिलने के कुछ घंटों बाद की। वह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के मौजूदा प्रशासन का हिस्सा हैं और भारत के साथ अंतिम जुड़ाव के तहत दो दिवसीय यात्रा पर आए हैं। सलिवन ने बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की।

बैठक के बाद मोदी ने एक्स पर लिखा, ‘भारत और अमेरिकी की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी नई ऊंचाइयों पर पहुंची है। इसका विस्तार तकनीक, रक्षा, अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हुआ है। हम अपने लोगों तथा वैश्विक बेहतरी के लिए दोनों लोकतंत्रों की इस गतिशीलता को बरकरार रखना चाहते हैं।’

भारत कार्बन उत्सर्जन कम करने तथा ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अगले दशक में परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल का तेजी से विस्तार करना चाह रहा है।

सलिवन ने कहा कि दोनों देश आईसीईटी साझेदारी के तहत पहले ही जेट इंजन, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारियां आगे बढ़ा चुके हैं और कुछ महीने बाद भारतीय अंतरिक्ष यात्री भी अंतरिक्ष में जा सकता है। दो वर्ष पहले शुरू की गई इस पहल के तहत भारत और अमेरिका अहम तथा उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग करने पर सहमत हुए हैं। इसमें आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और वायरलेस टेलीकॉम शामिल हैं।

सलिवन ने कहा कि भारत के निजी क्षेत्र का अमेरिका में निवेश हाल ही में चीन के निवेश को पीछे छोड़ चुका है और उसने वहां चार लाख रोजगार तैयार करने में मदद की है।

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First Published - January 6, 2025 | 11:21 PM IST

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