स्वास्थ्य

सरकारी अस्पताल या जेब पर बोझ? गरीब राज्यों के मरीजों को देना पड़ रहा राष्ट्रीय औसत से अधिक पैसा

देश के गरीब राज्यों के सरकारी अस्पतालों में इलाज का खर्च अमीर राज्यों से अधिक है, जहां बिहार-यूपी में मरीजों को राष्ट्रीय औसत से ज्यादा पैसा चुकाना पड़ता है

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हिमांशी भारद्वाज   
Last Updated- April 21, 2026 | 10:55 PM IST

बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश आदि देश के सबसे गरीब राज्यों के सरकारी अस्पतालों में इलाज का खर्च दक्षिण के तमिलनाडु जैसे अमीर राज्यों की तुलना में अधिक आता है। यही नहीं, तीनों राज्यों में मरीजों से राष्ट्रीय औसत 6,631 रुपये से ज्यादा पैसे लिए जाते हैं। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के पिछले साल जनवरी से दिसंबर तक किए गए घरेलू सामाजिक उपभोग: स्वास्थ्य सर्वेक्षण में सामने आई है।

इस सर्वेक्षण के विस्तृत आंकड़ों से पता चलता है कि बिहार में सरकारी अस्पताल में इलाज पर एक व्यक्ति को औसतन 10,553 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में यह राशि 12,878 रुपये और झारखंड में 12,364 रुपये होती है। खास यह कि ये तीनों ही प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से देश के सबसे गरीब राज्यों में शामिल हैं। हालांकि केंद्र शासित प्रदेशों में चंडीगढ़ इसका अपवाद है जहां सरकारी अस्पताल में एक मरीज पर देश भर में सबसे अधिक 24,013 रुपये खर्च होते हैं।

सरकारी इलाज के मामले में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के साथ इनकी तुलना काफी चौंकाने वाली है। तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में प्रति मरीज खर्च केवल 1,357 रुपये आता है, जबकि ओडिशा में यह 2,496 रुपये और छत्तीसगढ़ में 3,913 रुपये है।  सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के भीतर भी इलाज पर लागत में लगभग दस गुना तक अंतर आता है। यह अंतर अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता, कर्मचारियों की संख्या और मरीज द्वारा भुगतान करने से पहले उपचार की लागत वहन करने की क्षमता के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों के साथ तुलना करने में एक अलग ही तस्वीर उभरती है। तमिलनाडु में सरकारी अस्पतालों में औसत जेब से खर्च प्रति मामले केवल 1,357 रुपये दर्ज किया गया है, जो उत्तर प्रदेश में मरीज द्वारा भुगतान की जाने वाली राशि का लगभग आठवां हिस्सा है। आंध्र प्रदेश में यह खर्च 4,972 रुपये, तेलंगाना में 3,711 रुपये और छत्तीसगढ़ में 3,913 रुपये है। गुजरात 3,619 रुपये, राजस्थान 4,177 रुपये और ओडिशा में केवल 2,496 रुपये आता है। खास यह कि ओडिशा भी गरीबी के मामले में सबसे गरीब तीन राज्यों की तुलना में बहुत अलग नहीं है।

इलाज में खर्च का यह पैटर्न उन राज्यों में भी देखने को मिला, जिनकी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में अच्छी प्रतिष्ठा है। यानी केरल में सरकारी अस्पताल में प्रति मामले का खर्च 9,313 रुपये दर्ज किया गया है। यह बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश से कम जरूर है, लेकिन राष्ट्रीय औसत से 40.5 प्रतिशत ज्यादा है।

सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों में पूर्वोत्तर सबसे आगे हैं। मणिपुर में सरकारी अस्पताल में प्रति मरीज खर्च 16,007 रुपये पाया गया है, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुने से भी ज्यादा है। नागालैंड में यह राशि 16,342 रुपये तक पहुंच जाती है जबकि हिमाचल प्रदेश में अपेक्षाकृत उच्च आय स्तर के बावजूद प्रति मरीज इलाज खर्च 13,084 रुपये आता है। इस सर्वेक्षण में यह भी सामने आया है कि बीमा कवरेज में तेज वृद्धि आई है। वर्ष 2017-18 और 2025 के बीच ग्रामीण भारत में यह 14.1 प्रतिशत से बढ़कर 47.4 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 19.1 प्रतिशत से बढ़कर 44.3 प्रतिशत हो गई।

First Published : April 21, 2026 | 10:55 PM IST