HDFC AMC data leak case: बंबई हाईकोर्ट ने एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (HDFC AMC) के कथित डेटा लीक मामले में रैनसमवेयर ग्रुप ‘मॉर्फियस’ को चुराए गए गोपनीय डेटा के इस्तेमाल, वितरण या खुलासा करने से अस्थायी रूप से रोक दिया है। न्यायमूर्ति श्रीराम शिरसाट की अवकाशकालीन पीठ ने 29 मई को पारित अपने आदेश में कहा कि पहली नजर में इस मामले में अंतरिम राहत देने के लिए पर्याप्त आधार बनता है।
पीठ ने कहा, “यदि गोपनीय डेटा का दुरुपयोग, लीक या व्यापार किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे और वादी कंपनी को अपूरणीय एवं अपरिवर्तनीय नुकसान हो सकता है।” इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार को भी चुराए गए डेटा से जुड़े सभी खातों को हटाने, ब्लॉक करने और इनएक्टिव करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
यह आदेश एचडीएफसी एएमसी की याचिका पर दिया गया है। कंपनी ने कहा था कि वह लाखों निवेशकों के निवेश का प्रबंधन करती है और उसके पास निवेशकों के नाम, पते, पहचान दस्तावेज, पैन कार्ड, बैंक खाते और निवेश से संबंधित संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रहती है। कंपनी की आईटी प्रणाली में 16 मई को गड़बड़ी का पता चला था। इसके बाद हैकर ग्रुप ‘मॉर्फियस’ ने एक ईमेल भेजकर 680 जीबी से ज्यादा महत्वपूर्ण डेटा चोरी करने का दावा किया था।
कंपनी ने दावा किया कि उसने तुरंत आवश्यक कदम उठाए, नुकसान को सीमित करने के लिए जरूरी सुरक्षा प्रोटोकॉल एक्टिव किए और इस साइबर सुरक्षा घटना की सूचना भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) को भी दी।
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कंपनी ने हाईकोर्ट को बताया कि गोपनीय डेटा के लीक होने का लगातार खतरा बना हुआ है। यदि यह डेटा सार्वजनिक होता है, तो इससे न केवल लाखों व्यक्तिगत निवेशकों के सामने पहचान की चोरी (Identity Theft), वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य जोखिम खड़े हो सकते हैं, बल्कि कंपनी की प्रतिष्ठा और कारोबार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
बंबई हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 जून को निर्धारित की है।