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ITR Filing 2026: शेयर, म्युचुअल फंड और प्रॉपर्टी से हुई कमाई पर कैसे भरें टैक्स, जानें आसान तरीका

शेयर, MF या प्रॉपर्टी बेचने वालों के लिए ITR भरते समय नए कैपिटल गेन नियमों और सही ITR फॉर्म का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि बाद में किसी तरह की गड़बड़ी या नोटिस से बचा जा सके

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ऋषभ राज   
Last Updated- June 08, 2026 | 7:53 PM IST

अगर आपने वित्त वर्ष 26 (FY26) में शेयर बाजार में ट्रेडिंग की है, म्युचुअल फंड की यूनिट्स रिडीम की हैं या फिर कोई प्रॉपर्टी बेची है, तो यह खबर आपके काम की है। असेसमेंट ईयर 26-27 (AY 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का दौर शुरू हो चुका है। इस बार आपको टैक्स डिपार्टमेंट को अपने कैपिटल गेन्स (पूंजीगत लाभ) की जानकारी देते समय आपको कुछ खास नियमों और बदलावों का ध्यान रखना होगा, ताकि बाद में कोई ‘डिफेक्टिव रिटर्न’ का नोटिस न आए। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि इस बार आपको अपना टैक्स रिटर्न कैसे फाइल करना है और नियमों में क्या बदलाव हुए हैं।

सही ITR फॉर्म चुनना है सबसे जरूरी कदम

टैक्स रिटर्न भरते समय सबसे पहली उलझन यह होती है कि कौन सा फॉर्म चुना जाए। गलत फॉर्म चुनने से आपका रिटर्न रिजेक्ट हो सकता है।

  • ITR-1 (सहज): यह फॉर्म उन लोगों के लिए है जिनकी कुल सालाना कमाई 50 लाख रुपये तक है। अगर आपका कैपिटल गेन सिर्फ लिस्टेड इक्विटी शेयर्स या इक्विटी म्युचुअल फंड से हुआ है और वह सेक्शन 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक है, तो आप इस फॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं, बशर्ते आप बाकी सभी जरूरी शर्तें पूरी करते हों।
  • ITR-2: ज्यादातर निवेशकों के लिए यही फॉर्म काम आता है। अगर आपने प्रॉपर्टी, सोना (गोल्ड), बॉन्ड्स, फॉरेन सिक्योरिटीज या कोई और कैपिटल एसेट बेचा है, और आपकी बिजनेस या प्रोफेशन से कोई कमाई नहीं है, तो आपको ITR-2 भरना होगा।
  • ITR-3: यह फॉर्म उन लोगों के लिए है जिनकी कमाई का जरिया बिजनेस या प्रोफेशन है। अगर आप फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग करते हैं, तो टैक्स नियमों के तहत इसे बिजनेस इनकम माना जाता है और ऐसे में आपको ITR-3 ही चुनना होगा।

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कमाई पर कितना लगेगा टैक्स?

कैपिगल गेन्स पर कितना टैक्स लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने उस एसेट को अपने पास कितने समय तक रखा था यानी आपका होल्डिंग पीरियड क्या था।

इक्विटी शेयर्स और इक्विटी म्युचुअल फंड्स

अगर आपने लिस्टेड शेयर्स या इक्विटी म्युचुअल फंड को खरीदने के बाद 12 महीने से ज्यादा समय तक अपने पास रखा और फिर बेचा, तो यह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) कहलाएगा। 12 महीने से कम समय में बेचने पर यह शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा।

  • शॉर्ट-टर्म टैक्स (STCG): वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इस पर 20% की दर से टैक्स लगेगा।
  • लॉन्ग-टर्म टैक्स (LTCG): इस पर 12.5% की दर से टैक्स लगेगा। राहत की बात यह है कि एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक का लॉन्ग-टर्म गेन पूरी तरह टैक्स फ्री है। टैक्स सिर्फ इस लिमिट से ऊपर की कमाई पर ही देना होगा।

प्रॉपर्टी, गोल्ड और दूसरे एसेट्स को लेकर क्या हैं नियम

प्रॉपर्टी और सोने जैसी चीजों के लिए लॉन्ग-टर्म का समय 24 महीने से ज्यादा का होता है।

  • लॉन्ग-टर्म टैक्स (LTCG): अगर आप 24 महीने के बाद प्रॉपर्टी या गोल्ड बेचते हैं, तो मुनाफे पर 12.5% टैक्स देना होगा।
  • शॉर्ट-टर्म टैक्स (STCG): अगर तय समय से पहले इन्हें बेचा जाता है, तो होने वाला मुनाफा सीधे आपकी कुल कमाई में जोड़ दिया जाएगा और आप जिस भी टैक्स स्लैब में आते होंगे, उसी हिसाब से टैक्स लगेगा।

डेट म्युचुअल फंड के लिए जरूरी नियम: 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदे गए डेट म्युचुअल फंड्स पर अब कोई लॉन्ग-टर्म टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता। इनसे होने वाले मुनाफे को निवेशक की कुल इनकम में जोड़कर टैक्स स्लैब के हिसाब से ही टैक्स वसूला जाता है।

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इस बार रिपोर्टिंग हुई आसान, खत्म हुई पुरानी सिरदर्दी

पिछले साल यानी असेसमेंट ईयर 2025-26 में टैक्सपेयर्स को एक बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा था। बजट में 23 जुलाई 2024 को टैक्स नियमों में बदलाव हुए थे, जिसकी वजह से निवेशकों को 23 जुलाई से पहले और उसके बाद किए गए ट्रांजैक्शंस की अलग-अलग जानकारी देनी पड़ रही थी।

AY 2026-27 में इस सिरदर्दी से पूरी तरह आजादी मिल गई है। चूंकि वित्त वर्ष 2025-26 के सभी ट्रांजैक्शंस नए और बदले हुए नियमों के लागू होने के बाद ही हुए हैं, इसलिए अब आपको तारीखों के हिसाब से मुनाफे को अलग-अलग बांटकर दिखाने की कोई जरूरत नहीं है। इस बदलाव से ITR भरने की प्रक्रिया बेहद आसान हो गई है।

ITR फॉर्म में कहां और कैसे दिखाएं अपनी कमाई?

अपने मुनाफे की जानकारी देने के लिए आपको ITR फॉर्म में मौजूद Schedule CG (Capital Gains) का इस्तेमाल करना होता है।

  • Schedule 112A: अगर आपको लिस्टेड इक्विटी शेयर्स या इक्विटी ओरिएंटेड म्युचुअल  फंड्स को बेचने से लॉन्ग-टर्म मुनाफा हुआ है और उस पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) चुकाया गया है, तो आपको इसकी पूरी जानकारी सेड्यूल 112A में देनी होगी। यहां आपको शेयर या फंड का नाम, खरीदने की तारीख, बेचने की तारीख और खरीद की असल कीमत जैसी बारीकियां भरनी होंगी।
  • बाकी एसेट्स के लिए: इक्विटी से होने वाले शॉर्ट-टर्म मुनाफे और प्रॉपर्टी, गोल्ड या अन्य संपत्तियों से होने वाले हर तरह के कैपिटल गेन को सीधे सेड्यूल CG के जरिए ही रिपोर्ट किया जाता है।

Annual Information Statement (AIS) चेक करना न भूलें

रिटर्न फाइल करने की जल्दबाजी में सबसे बड़ी गलती जो टैक्सपेयर्स करते हैं, वह है अपने डॉक्यूमेंट्स को आपस में न मिलाना। फॉर्म सबमिट करने से पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर जाकर अपना AIS जरूर डाउनलोड करें।

इस स्टेटमेंट में आपके ब्रोकर, म्युचुअल फंड हाउसेज, बैंकों और रजिस्ट्री ऑफिस द्वारा टैक्स डिपार्टमेंट को भेजी गई आपके सभी बड़े लेन-देन की जानकारी होती है। ITR फाइल करने से पहले अपने ब्रोकर के प्रॉफिट एंड लॉस (P&L) स्टेटमेंट, म्युचुअल फंड की कैपिटल गेन रिपोर्ट्स और AIS के आंकड़ों को आपस में अच्छे से मिला लें।

अगर आपके द्वारा भरे गए आंकड़ों और AIS के डेटा में जरा भी अंतर या मिसमैच मिलता है, तो टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से नोटिस आने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए डेडलाइन का इंतजार किए बिना अपने सभी पेपर्स को सही-सही री-चेक करें और पूरी पारदर्शिता के साथ अपना रिटर्न फाइल करें, ताकि बिना किसी रुकावट के आपका फॉर्म आगे कैरी फॉरवर्ड हो सकें।

First Published : June 8, 2026 | 5:15 PM IST