अगर आपने वित्त वर्ष 26 (FY26) में शेयर बाजार में ट्रेडिंग की है, म्युचुअल फंड की यूनिट्स रिडीम की हैं या फिर कोई प्रॉपर्टी बेची है, तो यह खबर आपके काम की है। असेसमेंट ईयर 26-27 (AY 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का दौर शुरू हो चुका है। इस बार आपको टैक्स डिपार्टमेंट को अपने कैपिटल गेन्स (पूंजीगत लाभ) की जानकारी देते समय आपको कुछ खास नियमों और बदलावों का ध्यान रखना होगा, ताकि बाद में कोई ‘डिफेक्टिव रिटर्न’ का नोटिस न आए। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि इस बार आपको अपना टैक्स रिटर्न कैसे फाइल करना है और नियमों में क्या बदलाव हुए हैं।
टैक्स रिटर्न भरते समय सबसे पहली उलझन यह होती है कि कौन सा फॉर्म चुना जाए। गलत फॉर्म चुनने से आपका रिटर्न रिजेक्ट हो सकता है।
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कैपिगल गेन्स पर कितना टैक्स लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने उस एसेट को अपने पास कितने समय तक रखा था यानी आपका होल्डिंग पीरियड क्या था।
अगर आपने लिस्टेड शेयर्स या इक्विटी म्युचुअल फंड को खरीदने के बाद 12 महीने से ज्यादा समय तक अपने पास रखा और फिर बेचा, तो यह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) कहलाएगा। 12 महीने से कम समय में बेचने पर यह शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा।
प्रॉपर्टी और सोने जैसी चीजों के लिए लॉन्ग-टर्म का समय 24 महीने से ज्यादा का होता है।
डेट म्युचुअल फंड के लिए जरूरी नियम: 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदे गए डेट म्युचुअल फंड्स पर अब कोई लॉन्ग-टर्म टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता। इनसे होने वाले मुनाफे को निवेशक की कुल इनकम में जोड़कर टैक्स स्लैब के हिसाब से ही टैक्स वसूला जाता है।
पिछले साल यानी असेसमेंट ईयर 2025-26 में टैक्सपेयर्स को एक बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा था। बजट में 23 जुलाई 2024 को टैक्स नियमों में बदलाव हुए थे, जिसकी वजह से निवेशकों को 23 जुलाई से पहले और उसके बाद किए गए ट्रांजैक्शंस की अलग-अलग जानकारी देनी पड़ रही थी।
AY 2026-27 में इस सिरदर्दी से पूरी तरह आजादी मिल गई है। चूंकि वित्त वर्ष 2025-26 के सभी ट्रांजैक्शंस नए और बदले हुए नियमों के लागू होने के बाद ही हुए हैं, इसलिए अब आपको तारीखों के हिसाब से मुनाफे को अलग-अलग बांटकर दिखाने की कोई जरूरत नहीं है। इस बदलाव से ITR भरने की प्रक्रिया बेहद आसान हो गई है।
अपने मुनाफे की जानकारी देने के लिए आपको ITR फॉर्म में मौजूद Schedule CG (Capital Gains) का इस्तेमाल करना होता है।
रिटर्न फाइल करने की जल्दबाजी में सबसे बड़ी गलती जो टैक्सपेयर्स करते हैं, वह है अपने डॉक्यूमेंट्स को आपस में न मिलाना। फॉर्म सबमिट करने से पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर जाकर अपना AIS जरूर डाउनलोड करें।
इस स्टेटमेंट में आपके ब्रोकर, म्युचुअल फंड हाउसेज, बैंकों और रजिस्ट्री ऑफिस द्वारा टैक्स डिपार्टमेंट को भेजी गई आपके सभी बड़े लेन-देन की जानकारी होती है। ITR फाइल करने से पहले अपने ब्रोकर के प्रॉफिट एंड लॉस (P&L) स्टेटमेंट, म्युचुअल फंड की कैपिटल गेन रिपोर्ट्स और AIS के आंकड़ों को आपस में अच्छे से मिला लें।
अगर आपके द्वारा भरे गए आंकड़ों और AIS के डेटा में जरा भी अंतर या मिसमैच मिलता है, तो टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से नोटिस आने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए डेडलाइन का इंतजार किए बिना अपने सभी पेपर्स को सही-सही री-चेक करें और पूरी पारदर्शिता के साथ अपना रिटर्न फाइल करें, ताकि बिना किसी रुकावट के आपका फॉर्म आगे कैरी फॉरवर्ड हो सकें।