भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा कि विशेष अभियानों और प्रोत्साहन योजनाओं के परिणामस्वरूप बिना वारिस वाली जमा राशियों का ग्राहकों को मासिक भुगतान अक्टूबर से बढ़कर इस महीने तक 760 करोड़ रुपये प्रति माह हो गया है। यह भुगतान अप्रैल 2025 से सितंबर 2025 तक औसतन 180 करोड़ रुपये महीने था।
नीतिगत बैठक के बाद प्रेस कान्फ्रेंस में रिजर्व बैंक के कार्यकारी निदेशक लक्ष्मी कांत राव ने कहा, ‘दो मुख्य कारण रहे। पहला, अक्टूबर से दिसंबर तक 3 महीने के लिए भारत सरकार के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) और रिजर्व बैंक ने अभियान चलाया। इस वजह से बड़ी संख्या में दावेदारों को धन वापस किया गया। साथ ही, हमने बैंकों के लिए प्रोत्साहन योजना भी शुरू की, जिससे मदद मिली। यह लगभग एक साथ ही हुआ। इन दोनों पहल के कारण बड़ी राशि वापस की गई। इससे पहले अप्रैल 2025 से सितंबर 2025 तक हर माह औसत रिफंड लगभग 180 करोड़ रुपये था। इस अभियान के बाद अक्टूबर से अब तक हर महीने औसतन 760 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है।’
राव ने कहा, ‘इस हिसाब से यह तेज वृद्धि है। हम तेजी से ग्राहकों का पता लगाने और उन्हें राशि वापस करने के लिए बैंकों को 600 करोड़ रुपये का भुगतान कर रहे हैं।’
भारत सरकार ने अक्टूबर से दिसंबर के दौरान आपकी पूंजी, आपका अधिकार नाम से देश भर में अभियान चलाया, जिससे कि बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियों का उनके कानूनी दावेदारों को भुगतान किया जा सके। इन संपत्तियों में बैंक जमा, बीमा, लाभांश, शेयर, म्युचुअल फंड और पेंशन का भुगतान शामिल है।
इस अभियान में वित्तीय क्षेत्र के सभी प्रमुख नियामक-भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई), पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) और निवेशक शिक्षा और संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए) ने सक्रियता से भाग लिया।
हाल ही में राज्य सभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा था कि 748 जिलों में विशेष शिविर लगाए गए थे और 28 फरवरी, 2026 तक 22.95 लाख दावों से संबंधित 5,777 करोड़ रुपये की वित्तीय संपत्तियों को उनके सही मालिकों को वापस किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि 31 जनवरी, 2026 तक रिजर्व बैंक के जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता (डीईए) फंड में 60,518 करोड़ रुपये थे।