राजनीति

AAP के 7 सांसद BJP में शामिल: अयोग्यता पर विवाद, पार्टी ने कोर्ट जाने की दी चेतावनी

राज्य सभा के सभापति ने आप छोड़ने वाले सातों सांसदों के भाजपा में विलय को किया स्वीकार

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अर्चिस मोहन   
Last Updated- April 27, 2026 | 10:26 PM IST

आम आदमी पार्टी (आप) ने सोमवार को कहा कि यदि राज्य सभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन उसकी उस याचिका पर संज्ञान नहीं लेते, जिसमें राघव चड्ढा समेत पार्टी के सात सांसदों को दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी कानून का उल्लंघन करने के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है, तो वह अदालत का रुख करेगी। आप के 10 राज्य सभा सांसदों में से सात ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो रहे हैं। सोमवार को राज्य सभा के सभापति ने औपचारिक रूप से इन सातों सांसदों के भाजपा में विलय को स्वीकार कर लिया।

राज्य सभा की वेबसाइट पर दोनों पार्टियों की बदली हुई ताकत दिखाई गई है। उच्च सदन में भाजपा की संख्या बढ़कर 113 हो गई है। यह आंकड़ा अभी 245 सदस्यीय सदन में बहुमत से दस कम है। पिछले हफ्ते तक 10 सांसदों के साथ उच्च सदन में चौथी सबसे बड़ी पार्टी आप के सांसदों की संख्या घटकर तीन ही रह गई है। जिन सात सांसदों ने भाजपा का दामन थामा है, उनमें से छह पंजाब से हैं, जहां अगले साल फरवरी-मार्च तक विधान सभा चुनाव होने हैं। वर्ष 2022 के विधान सभा चुनावों में पंजाब में भारी जीत के साथ आप ने कांग्रेस को सत्ता से हटाकर अपनी सरकार बनाई थी।

कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि आप ने राज्य सभा टिकट पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को नहीं, बल्कि पैसे के आधार पर दिए थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी कोषाध्यक्ष अजय माकन ने आरोप लगाया कि आप ने पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में कांग्रेस का मुकाबला करने के लिए भाजपा के प्रॉक्सी के रूप में काम किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सात सांसदों में से प्रत्येक की कुल संपत्ति 818 करोड़ रुपये है।

राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता वे सात सांसद हैं, जिन्होंने आप का साथ छोड़ भाजपा में विलय किया है। मित्तल जालंधर के लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के मालिक हैं। साहनी उद्यमी हैं। गुप्ता बड़े उद्योगपति हैं और हरभजन सिंह स्थापित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर रहे हैं।

पंजाब के आनंदपुर साहिब से आप के लोक सभा सांसद मलविंदर सिंह कांग ने सोमवार को आरोप लगाया कि इन सातों में से कुछ सांसदों को ईडी का डर था। अपने व्यवसायों को बचाने के लिए उन्होंने पाला बदला है। मित्तल के परिसरों पर इसी महीने की शुरुआत में केंद्रीय एजेंसियों ने छापे मारे थे।

आप के राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने कहा, ‘राज्य सभा सभापति ने पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल होने वाले सात सांसदों के विलय को स्वीकार कर लिया है। हमारे द्वारा उठाई गई आपत्तियों और दसवीं अनुसूची के तहत हमने जो उन्हें अयोग्य घो​षित करने की मांग उठाई थी, उस पर विचार ही नहीं किया गया।’

इस संबंध में आप ने रविवार को सभापति को पत्र लिखकर अनुरोध किया था। सिंह ने कहा, ‘आप को उम्मीद है कि एक बार उसके पत्र की जांच हो जाने के बाद सभापति सात सदस्यों को अयोग्य घोषित कर संविधान और लोकतंत्र के पक्ष में कार्य करेंगे। यदि ऐसा नहीं होता है, तो हम अदालत का रुख करेंगे। इस तरह पार्टी तोड़ना गलत है।’

पूर्व लोक सभा महासचिव पीडीटी आचार्य और उच्चतम न्यायालय के वकील एवं पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल जैसे संवैधानिक विशेषज्ञों ने विलय पर सवाल उठाए हैं। सिब्बल ने कहा कि आप सांसदों का भाजपा में विलय असंवैधानिक है, क्योंकि कानून इसकी अनुमति तभी देता है जब पार्टी का पहले विलय हो।

संविधान कहता है कि पहले राजनीतिक दल को संगठनात्मक स्तर पर निर्णय लेना चाहिए, एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए, जिसमें यह तय किया जाए कि राजनीतिक दल के रूप में वे भाजपा में विलय करना चाहते हैं और उसके बाद ही यह किया जा सकता है। पहले पार्टी का विलय होता है, फिर सांसदों का। इसका उल्टा नहीं हो सकता। सिब्बल ने कहा कि यदि ऐसा होता है तो यह संविधान की अनुसूची 10 के विरुद्ध कदम है।

दोनों ने दसवीं अनुसूची के पैराग्राफ 4 का उल्लेख किया है, जिसमें कहा गया है, ‘किसी सदन का सदस्य अयोग्य नहीं होगा। जब उसका मूल राजनीतिक दल किसी अन्य राजनीतिक दल में विलीन हो जाता है और वह दावा करता है कि वह और उसके मूल राजनीतिक दल के कोई अन्य सदस्य ऐसे अन्य राजनीतिक दल या जैसा भी मामला हो, ऐसे विलय द्वारा गठित एक नए राजनीतिक दल के सदस्य बन गए हैं।’

एक्स पर अपनी पोस्ट में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि राज्य सभा के सभापति ने सात सांसदों के भाजपा में विलय को स्वीकार कर लिया है, और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में सात सांसदों का स्वागत है।

First Published : April 27, 2026 | 10:15 PM IST