सन 1973 में उज्जैन के नागदा कस्बे में जन्मीं मीनाक्षी नटराजन ने इंदौर से बायोकेमेस्ट्री की पढ़ाई की है | फोटो: Facebook/Meenakshi Natarajan
मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों में से एक सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का राज्य सभा का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। उनकी जगह कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बना तो दिया लेकिन नाम की घोषणा के साथ ही अचानक राजनीतिक गुणा-गणित और क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं पर चर्चा शुरू हो गई।
आंकड़ों के खेल में कांग्रेस को अपनी सीट के लिए केवल सात वोटों का बचाव हासिल है लेकिन नटराजन के नाम पर कांग्रेस नेताओं के सार्वजनिक असंतोष ने पार्टी की दुविधा को बढ़ा दिया है। अब उनका चुनाव जीतना केवल औपचारिकता नहीं रह गया है।
सन 1973 में उज्जैन के नागदा कस्बे में जन्मीं मीनाक्षी नटराजन ने इंदौर से बायोकेमेस्ट्री की पढ़ाई की है। वह 1999 से 2002 तक एनएसयूआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष रहीं। 2002 से 2005 तक वह मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस की अध्यक्ष भी रहीं। वह किसी राजनीतिक परिवार की सदस्य नहीं रही हैं। 2009 में मंदसौर से लोक सभा का चुनाव जीतने वाली मीनाक्षी नटराजन आमतौर पर विवादों से दूर रहती हैं। उनका नाम 2013 में उस समय सुर्खियों में आया था जब मंदसौर में एक जन सभा में दिग्विजय सिंह ने उनकी तारीफ करते हुए एक विवादित टिप्पणी कर दी थी।
वर्तमान में तेलंगाना कांग्रेस की प्रभारी मीनाक्षी नटराजन को राहुल गांधी का अत्यंत विश्वसनीय सहयोगी माना जाता है। उनके इस चयन को वफादारी और सांगठनिक क्षमता के ईनाम के रूप में देखा जा रहा है।
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हालांकि उनके चयन के साथ ही कांग्रेस के भीतर से भी विरोध के स्वर सुनाई देने लगे हैं। भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से दोबार चुनाव लड़ चुके कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को टैग करके कहा है कि पार्टी ने उम्मीदवार चयन में भूल की है और दिग्विजय सिंह को दोबारा राज्य सभा में भेजना अधिक उपयुक्त होता।
मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के 64 विधायक हैं। राज्य सभा चुनाव के लिए उसे 58 विधायकों की जरूरत है। भाजपा के पास 48 वोट बचेंगे और तीसरी सीट के लिए उसे 10 मतों की आवश्यकता होगी।
कांग्रेस की दिक्कत यह है कि दतिया विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो चुकी है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे। जबकि बीना विधायक निर्मला सप्रे के भाजपा का समर्थन करने की उम्मीद है। ऐसे में अगर कुछ सदस्यों ने क्रॉस वोटिंग की तो कांग्रेस के लिए सीट जीतना मुश्किल हो जाएगा।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, ‘दिग्विजय सिंह की घोषणा के बाद पार्टी आलाकमान को उनसे बात करनी चाहिए थी। वह प्रदेश के विधायकों पर बहुत मजबूत पकड़ रखते हैं। उनके मना करने पर कमल नाथ के नाम पर विचार किया जाना चाहिए था। शायद हुआ भी लेकिन अंतत: मीनाक्षी नटराजन का नाम घोषित कर दिया गया।’