राजनीति

केरल में UDF ने LDF को दी ​शिकस्त, सत्ता विरोधी लहर में ढह गया वामपंथ का आ​खिरी किला

कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) ने 102 सीटों के साथ भारी जीत दर्ज की, जबकि एलडीएफ सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया

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सुन्दर सेतुरामन   
Last Updated- May 04, 2026 | 11:16 PM IST

केरल विधान सभा चुनावों में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे  (एलडीएफ)को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा। वामपंथी गठबंधन ने 2021 में लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की थी। इस हार के साथ वामपंथियों ने अपना आखिरी गढ़ खो दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) ने 102 सीटों के साथ भारी जीत दर्ज की, जबकि एलडीएफ सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। उसने 2021 में 99 सीटों पर विजय हासिल की थी। वामपंथी सरकार में कुल 21 मंत्रियों में से, जिनमें मुख्यमंत्री भी शामिल थे, केवल छह मंत्री ही चुनाव जीत पाए। इसके अलावा नौ वामपंथी बागियों में से तीन ने जीत हासिल की। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केरल विधान सभा में खाता खोलकर अपना प्रभाव बढ़ाया।

तिरुवनंतपुरम के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक एमजी राधाकृष्णन ने कहा, ‘हम जो देख रहे हैं वह एक प्रचंड सत्ता विरोधी लहर है और लगभग एक सुनामी की तरह है, जो सभी सामाजिक और राजनीतिक, अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक, लिंग, क्षेत्र और आयु वर्ग से जुड़ी है।  यह केवल अल्पसंख्यक एकजुटता का मामला नहीं है, यह एलडीएफ के खिलाफ एक बड़ी हार है, जिसमें मलाबार जैसे इलाके भी शामिल हैं, जो ऐतिहासिक रूप से माकपा के गढ़ रहे हैं।’

राधाकृष्णन ने यह भी कहा कि यह परिणाम केरल में वामपंथियों के लिए सबसे बड़ा चुनावी झटका हो सकता है, जिसकी 1977 के आपातकाल के बाद के चुनावों जैसी स्थिति से तुलना की जा सकती है। 2021 में एलडीएफ की जीत एक अपवाद थी, जो असाधारण परिस्थितियों विशेष रूप से महामारी के कारण हुई थी, जब मतदाता मजबूत और स्थिर सरकारों के पक्ष में एकजुट हो जाते हैं। अब जब वह परिस्थितियां नहीं हैं, तो केरल अपने पारंपरिक पैटर्न की ओर लौट आया है, जिसमें सत्ता में बैठी सरकारों को बाहर कर दिया जाता है। हालांकि, जो इस बार के फैसले को असाधारण बनाता है, वह इसकी व्यापकता है।

एलडीएफ की हार के बाद अब केरल में वामपंथी पार्टी का मुख्य किला ढह चुका है। माकपा  केरल में तब भी प्रासंगिक बनी रही, जब उसे पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में सत्ता से बाहर कर दिया गया था। माकपा के नेतृत्व वाले वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) ने पिछले चार विधान सभा चुनावों में से तीन में जीत दर्ज की थी।

First Published : May 4, 2026 | 11:08 PM IST