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दुनिया की प्रमुख मूल उपकरण निर्माता कंपनियां (ओईएम) और एक नई घरेलू कंपनी सरकार से मांग कर रही हैं कि बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (बीईवी) पर जिस तरह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर केवल 5 फीसदी लगा कर राहत दी गई है, वैसी ही सुविधा रेंज एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहनों (आरईईवी) को भी दी जाए। आरईईवी हाइब्रिड यात्री वाहन है, जिसने चीन में धूम मचा रखी है।
लेकिन महिंद्रा ऐंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स जैसी जिन प्रमुख भारतीय कार कंपनियों का जो ईवी पर हैं, ने सार्वजनिक रूप से सरकार के ऐसे किसी भी कदम का विरोध किया है कि जिसके तहत हाइब्रिड कारों पर जीएसटी कम किया या बीईवी के बराबर रखा जाए।
आरईईवी प्लग-इन हाइब्रिड से अलग हैं। इनमें एक इलेक्ट्रिक मोटर होती है और बैटरी की क्षमता क्रॉसओवर वाहनों में 20 किलोवॉट प्रति घंटा और बड़े प्रीमियम एसयूवी में 80 किलोवॉट प्रति घंटा तक हो सकती है। इसमें एक छोटा इंजन भी लगा होता है। जब बैटरी किसी न्यूनतम स्तर से नीचे गिरती है तब इंजन जेनरेटर की तरह काम करता है और बैटरी को चार्ज करके ड्राइविंग रेंज बढ़ाता है, जिससे गाड़ी बीच में ही बंद हो जाने की चिंता खत्म हो जाती है।
आरईईवी में इंजन सीधे कार के पहियों से जुड़ा नहीं होता और केवल इलेक्ट्रिक मोटर ही पहियों को घुमाती है। जबकि प्लग-इन हाइब्रिड में कार इलेक्ट्रिक मोटर से भी चल सकती है और पेट्रोल इंजन से भी। इस कदम का समर्थन कर रही वाहन कंपनियों का कहना है कि चीन, जहां 3.5 करोड़ नए-ऊर्जा वाहन हैं और 1.75 करोड़ चार्जिंग स्टेशन हैं, मगर वह अपनी नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति में केवल बीईवी पर निर्भर नहीं रहा।