पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा चलने की स्थिति में भारत की अर्थव्यवस्था पर राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार वित्त वर्ष 27 में राजस्व संग्रह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के साथ-साथ खाद्य पदार्थों और उर्वरकों पर सब्सिडी का खर्च भी बढ़ सकता है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष इस महीने की शुरुआत में छिड़ा था और उसके बाद से यूरिया के दाम 100 डॉलर प्रति टन बढ़कर लगभग 600 डॉलर प्रति टन (एफओबी) तक पहुंच गए हैं। इस क्रम में डीएपी की कीमतें भी संकट के दौरान 650-670 डॉलर प्रति टन से बढ़कर लगभग 750-770 डॉलर प्रति टन हो गई हैं। भारत ने वित्त वर्ष 2025 में खाड़ी देशों से अपने यूरिया का लगभग 70 प्रतिशत, डाई-अमोनिया फॉस्फेट (डीएपी) का 42 प्रतिशत, अमोनिया का 83 प्रतिशत और एलएनजी का 60 प्रतिशत आयात किया।
उर्वरक उत्पादन में प्रमुख घटक अमोनिया है। उसकी कीमतों में अगले तिमाही निर्धारण चक्र में तेज वृद्धि की उम्मीद है। उर्वरक में इस्तेमाल होने वाली अहम सामग्री रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड की कीमतें बढ़ रही हैं।
वित्त मंत्रालय ने किसी भी अचानक आर्थिक झटके से निपटने के लिए कदम उठाए। इसके तहत मंत्रालय ने मंगलवार को संसद में पेश किए गए अनुदानों की दूसरी अनुपूरक मांगों के हिस्से के रूप में वित्त वर्ष 26 के लिए आर्थिक स्थिरीकरण कोष के लिए आबंटन को बढ़ाकर एक लाख करोड़ रुपये कर दिया। इस क्रम में वित्त वर्ष 26 के लिए उर्वरक सब्सिडी के मद में 19,230 करोड़ रुपये और खाद्य सब्सिडी के लिए 23,640 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भी आबंटित किया गया।
वित्त वर्ष 27 के बजट अनुमान में खाद्य सब्सिडी 2,27,629 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जो वित्त वर्ष 26 के संशोधित अनुमान से थोड़ी कम है। हालांकि सूत्रों ने कहा कि यदि सरकार केंद्रीय पूल के लिए अनुमान से अधिक गेहूं और चावल की खरीद करती है तो पहले से ही बढ़ा हुआ अनाज का भंडार और भी ज्यादा हो सकता है। लिहाजा खाद्य सब्सिडी और बढ़ जाएगी।
केंद्र ने वित्त वर्ष 27 में लगभग 3.03 करोड़ टन गेहूं की खरीद का अनुमान लगाया है किंतु व्यापारियों ने कहा कि वास्तविक खरीद इससे अधिक हो सकती है। कारण यह है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मौजूदा बाजार दर से काफी अधिक है।
सब्सिडी की गणना सामान्य मॉनसून पर भी निर्भर करती है। यदि वित्त वर्ष 27 में अल नीनो के कारण मॉनसून सामान्य से कम रहता है तो खजाने पर और बोझ आ सकता है क्योंकि कृषि और ग्रामीण कार्यों के लिए मदद बढ़ानी पड़ेगी।
क्रिसिल इंटेलिजेंस ने बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष नया और बहुआयामी जोखिम है और इससे वित्त वर्ष 27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान और भी नीचे आ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘ अगर पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं लंबे अरसे तक बनी रहीं तो कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची रहेंगी और आयात भी महंगा हो सकता है। इससे 2026-27 में चालू खाते का घाटा बढ़कर जीडीपी के 1.5 प्रतिशत तक हो सकता है। वित्त वर्ष 2026 में यह घाटा जीडीपी के 0.8 प्रतिशत तक रहने का अनुमान लगाया
गया है।’
नोमूरा ने भी अपने मासिक ग्लोबल इकनॉमिक आउटलुक में कहा कि अगर तनाव बना रहता है तो भारत में तेज वृद्धि और स्थिर मुद्रास्फीति की बेहतरीन स्थिति डांवांडोल हो सकती है। वित्त वर्ष 2027 में शुद्ध कर राजस्व 7.2 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान लगाया गया है लेकिन वृद्धि सुस्त पड़ी तो संग्रह कम रह सकता है।
वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा में पिछले दिनों कहा गया था कि खाड़ी संघर्ष के कारण आने वाले वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों को राजकोषीय संसाधन ढूंढ़ने पड़ेगे और प्राथमिकता नए सिरे से तय करनी पड़ सकती हैं।