क्रिसिल रेटिंग्स का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अपेक्षित ऋण हानि (ईसीएल) व्यवस्था पर अंतिम निर्देशों से बैंकों के कॉमन इक्विटी टियर 1 (सीईटी-1) अनुपात पर एक बार में 120 आधार अंकों (बीपीएस) तक का शुद्ध प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि इससे उनकी ऋण प्रोफाइल में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है।
उधर इक्रा ने कहा कि ईसीएल-आधारित ढांचे में बदलाव से शुरुआती वर्षों में ऋण लागत बढ़ने की उम्मीद है। इसका प्रभाव बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता, प्रावधान बफर और पोर्टफोलियो मिश्रण के आधार पर अलग-अलग होगा। हालांकि, बैंक चार वित्त वर्षों में इस प्रभाव को सहन करने में सक्षम होंगे जबकि अतिरिक्त ऋण प्रावधान से प्रभाव को और कम किया जा सकता है। क्षेत्र का ऋण प्रोफाइल मजबूत पूंजीकरण बफर के कारण स्थिर रहने की आस है।
भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों में डिफॉल्ट की आशंका (पीडी), डिफॉल्ट होने पर हानि (एलजीडी) और डिफॉल्ट होने के जोखिम (ईएडी) के आधार पर प्रावधान में तीन-स्तरीय परिसंपत्ति वर्गीकरण संरचना प्रस्तुत की गई है। इसमें विभिन्न चरणों में प्रावधान संबंधी आवश्यकताएं भिन्न-भिन्न हैं। चरण 1 की परिसंपत्तियों के लिए 12 महीने के अपेक्षित ऋण हानि के आधार पर प्रावधान की आवश्यकता होगी जबकि चरण 2 और चरण 3 की परिसंपत्तियों के लिए जीवन भर के अपेक्षित ऋण हानि प्रावधान की आवश्यकता होगा। इससे ऋणों के विभिन्न चरणों में जाने पर बोझ बढ़ जाएगा। विवेकपूर्ण तय करने के लिए इन मानदंडों में परिसंपत्ति वर्गों के लिए न्यूनतम प्रावधान सीमा भी निर्धारित की गई है।
क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक सुभा श्री नारायणन ने कहा, “बैंकों द्वारा मौजूदा हानि-आधारित मॉडल से भविष्योन्मुखी ईसीएल ढांचे की ओर बढ़ने के साथ, उनके सीईटी-1 अनुपात पर सकल प्रभाव अधिकांश बैंकों के लिए 170 बीपीएस तक होने की उम्मीद है। यह पोर्टफोलियो संरचना, परिसंपत्ति गुणवत्ता के पिछले रिकॉर्ड और मौजूदा प्रावधान स्तरों के आधार पर भिन्न हो सकता है।