सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (मोस्पी) द्वारा सतत विकास लक्ष्यों (SDG) पर जारी 2 बुलेटिनों के अनुसार भारत एक ऐसी विकास रणनीति को आगे बढ़ा रहा है जिसमें आर्थिक बदलाव के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता शामिल है।
सतत विकास के 2030 के एजेंडा में शामिल पीपुल, प्लानेट, प्रॉस्परिटी, पीस और पार्टनरशिप नाम के 5 बुनियादी स्तंभों की बड़ी श्रृंखला के तहत ये रिपोर्ट तैयार की गई है। इन सबका तर्क है कि विकास को सामाजिक समानता, संसाधनों के कुशल उपयोग और पारिस्थितिक संरक्षण से जोड़ने में ही दीर्घकालीन बेहतरी है।
स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को लेकर इस बुलेटिन में कहा गया है कि स्वच्छ भारत मिशन से स्वच्छता क्रांति आई है और 2019-20 तक सभी जिले खुले में शौच करने से मुक्त जिले बन चुके हैं।
लैंगिक संवेदनशीलता और स्वच्छता के मसले पर रिपोर्ट में कहा गया है कि चंडीगढ़, गोवा, दिल्ली, दादरा और नागर हवेली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह व लक्षद्वीप सहित 6 क्षेत्र 100 प्रतिशत अनुपालन कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘स्कूलों में लैंगिक संवेदनशील स्वच्छता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता एक रणनीतिक प्रयास को दर्शाती है।’ इसके साथ ही कचरे के रिसाइक्लिंग संबंधी बुनियादी ढांचे का निर्माण भी बहुत तेजी से हुआ है। 2019-20 में जहां रिसाइक्लिंग सुविधा 829 थी, 2024-25 में बढ़कर 3,036 हो गई है।