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टाटा ग्रुप में हलचल तेज! बोर्ड बैठक से पहले नोएल टाटा-चंद्रशेखरन की अहम मुलाकात, बड़े फैसलों के संकेत

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस प्रमुख एन. चंद्रशेखरन के बीच बोर्ड बैठक से पहले अहम मुलाकात हुई, जिससे लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध खत्म होने के संकेत मिले।

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निवेदिता मुखर्जी   
Last Updated- May 25, 2026 | 9:07 AM IST

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के बीच सप्ताहांत में मुलाकात हुई है। इसके साथ ही उनके बीच करीब तीन महीने से जारी बातचीत का गतिरोध खत्म हो गया है। यह गतिरोध टाटा ट्रस्ट्स के भीतर मतभेदों के कारण पनपा था। यह मुलाकात 26 मई को होने वाली टाटा संस की बोर्ड बैठक से ठीक पहले हुई है।

हालिया मुलाकात को शिष्टाचार भेंट के रूप में देखा जा रहा है जो मंगलवार की बोर्ड बैठक का एजेंडा तय करने के उद्देश्य से थी। टाटा संस की बोर्ड बैठक वहीं से आगे बढ़ेगी जहां 24 फरवरी को हुई पिछली बोर्ड बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई थी।

टाटा ट्रस्ट्स या टाटा संस की ओर से नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन के बीच बैठक की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने फरवरी की बैठक में एयर इंडिया, टाटा डिजिटल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी समूह की कंपनियों के वित्तीय मामलों पर सवाल उठाए थे। नोएल टाटा टाटा संस के बोर्ड में दो नामित निदेशकों में से एक हैं। उन्होंने कथित तौर पर टाटा समूह की कई कंपनियों की लाभप्रदता को चंद्रशेखरन को दिए जाने वाले तीसरे कार्यकाल से जोड़ा था।

नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक तमाम क्षेत्रों में कारोबार करने वाले इस समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध बनाए रखना उस बैठक में नोएल टाटा द्वारा उठाया गया एक प्रमुख मुद्दा था। टाटा संस की यह बोर्ड बैठक बेहद अहम है क्योंकि उम्मीद है कि यह टाटा समूह के भविष्य के नेतृत्व की दिशा तय करेगी। यह निर्णय ऐसे समय में होगा जब टाटा समूह का ध्यान आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और रक्षा जैसे अत्यधिक पूंजी निवेश वाले हाईटेक कारोबार पर केंद्रित है। बैठक में समूह के उन कारोबार पर भी चर्चा होगी जो अब तक लाभ नहीं कमा रहे हैं।

बैठक में चंद्रशेखरन के कार्यकाल के नवीनीकरण पर भी विचार किए जाने की संभावना है। करीब 62 वर्षीय चंद्रशेखरन का टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन के रूप में दूसरा पांच साल का कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होने जा रहा है। टाटा ट्रस्ट्स ने जुलाई 2025 में एक प्रस्ताव पारित कर टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन के रूप में चंद्रशेखरन को पांच साल के तीसरे कार्यकाल के लिए अपनी सहमति दी थी।
टाटा संस को सूचीबद्ध कराने पर चर्चा भी बोर्ड बैठक के एजेंडे में शामिल हो सकती है। टाटा ट्रस्ट्स के जुलाई 2025 के प्रस्ताव ने टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध कंपनी बनाए रखने के प्रस्ताव का भी समर्थन किया था। हाल में टाटा ट्रस्ट्स के दो वाइस चेयरमैन- वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह- ने मीडिया से बातचीत में भविष्य की पूंजी जरूरतों के मद्देनजर टाटा संस को सूचीबद्ध कराने का पक्ष लिया था।
इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से जल्द ही टाटा संस की सूचीबद्धता पर फैसला आने की उम्मीद है। आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को एक ऊपरी श्रेणी की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया था जिसके लिए उसे तीन साल के भीतर सूचीबद्ध कराना अनिवार्य है। मगर साल  2024 में टाटा संस ने अनिवार्य सूचीबद्धता से छूट मांगते हुए कर्ज मुक्त कंपनी बन गई। उसके बाद आरबीआई ने टाटा संस को सूचीबद्ध कराने पर कोई निर्देश नहीं दिया है। मगर हाल में आरबीआई ने संकेत दिया है कि वह ऊपरी श्रेणी की एनबीएफसी के रूप में गैर-सूचीबद्ध नहीं रह पाएगी क्योंकि समूह की कंपनियों के जरिये सार्वजनिक धन तक उसकी अप्रत्यक्ष तौर पर पहुंच है।
First Published : May 25, 2026 | 9:07 AM IST