नोएल टाटा (बाएं) और एन. चंद्रशेखरन की सप्ताहांत में हुई मुलाकात, टाटा ट्रस्ट्स में चल रही आंतरिक असहमति के बीच अहम चर्चा मानी जा रही है।
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के बीच सप्ताहांत में मुलाकात हुई है। इसके साथ ही उनके बीच करीब तीन महीने से जारी बातचीत का गतिरोध खत्म हो गया है। यह गतिरोध टाटा ट्रस्ट्स के भीतर मतभेदों के कारण पनपा था। यह मुलाकात 26 मई को होने वाली टाटा संस की बोर्ड बैठक से ठीक पहले हुई है।
हालिया मुलाकात को शिष्टाचार भेंट के रूप में देखा जा रहा है जो मंगलवार की बोर्ड बैठक का एजेंडा तय करने के उद्देश्य से थी। टाटा संस की बोर्ड बैठक वहीं से आगे बढ़ेगी जहां 24 फरवरी को हुई पिछली बोर्ड बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई थी।
टाटा ट्रस्ट्स या टाटा संस की ओर से नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन के बीच बैठक की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने फरवरी की बैठक में एयर इंडिया, टाटा डिजिटल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी समूह की कंपनियों के वित्तीय मामलों पर सवाल उठाए थे। नोएल टाटा टाटा संस के बोर्ड में दो नामित निदेशकों में से एक हैं। उन्होंने कथित तौर पर टाटा समूह की कई कंपनियों की लाभप्रदता को चंद्रशेखरन को दिए जाने वाले तीसरे कार्यकाल से जोड़ा था।
नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक तमाम क्षेत्रों में कारोबार करने वाले इस समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध बनाए रखना उस बैठक में नोएल टाटा द्वारा उठाया गया एक प्रमुख मुद्दा था। टाटा संस की यह बोर्ड बैठक बेहद अहम है क्योंकि उम्मीद है कि यह टाटा समूह के भविष्य के नेतृत्व की दिशा तय करेगी। यह निर्णय ऐसे समय में होगा जब टाटा समूह का ध्यान आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और रक्षा जैसे अत्यधिक पूंजी निवेश वाले हाईटेक कारोबार पर केंद्रित है। बैठक में समूह के उन कारोबार पर भी चर्चा होगी जो अब तक लाभ नहीं कमा रहे हैं।