मेटा की मेसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप ने जनवरी 2026 में शुरू की गई एक पड़ताल के बाद ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ (डिजिटल अरेस्ट) धोखाधड़ी और पुलिस या अन्य विभाग का डर दिखाकर परेशान करने के मामलों से जुड़े 9,400 खाते हटा दिए हैं। केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को यह जानकारी दी है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली संस्था भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की तरफ से भारत के महाधिवक्ता आर वेंकटरमानी द्वारा दायर एक स्थिति रिपोर्ट के माध्यम से यह जानकारी दी गई।
यह रिपोर्ट जाली दस्तावेज और उत्पीड़न की मंशा से संबंधित डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में बढ़ोतरी से निपटने के लिए चल रही स्वतः संज्ञान कार्यवाही का हिस्सा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दूरसंचार कंपनियों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वित्तीय नियामकों सहित कई हितधारकों ने 9 फरवरी 2026 को न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों के बाद समन्वित हस्तक्षेप शुरू कर दिए हैं। इन उपायों में संदिग्ध सिम कार्ड बंद करना, बायोमेट्रिक पहचान सत्यापन ढांचे का विकास और प्लेटफॉर्म स्तर पर सुरक्षा उपाय बढ़ाना शामिल हैं।
अदालत के निर्देशों के अनुसार गठित अंतर-विभागीय समिति को भेजे गए एक पत्र में व्हाट्सएप ने भारतीय उपयोगकर्ताओं (यूजर) को निशाना बनाने वाले धोखाधड़ी नेटवर्क पर केंद्रित एक सुनियोजित, कई हफ्तों तक चलने वाली जांच की रूप-रेखा प्रस्तुत की। इस प्रक्रिया में शुरुआती संकेतों की पहचान करना, संबंधित खातों का मानचित्रण करना और दोहराव रोकने के लिए स्वचालित प्रणालियां बनाना शामिल थे। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप डिजिटल अरेस्ट और कानून प्रवर्तन अधिकारी होने का दावा करने वाले से जुड़े मामलों संलिप्तता के कारण 9,400 खाते निष्क्रिय कर दिए गए। मेटा ने संकेत दिया कि उसकी कार्रवाई का दायरा सरकार से मिली जानकारियों से कहीं अधिक है।
सूचना- प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 79 के तहत चिह्नित लगभग 3,800 खातों में केवल कुछ ही सीधे तौर पर डिजिटल गिरफ्तारी धोखाधड़ी से जुड़े थे। हालांकि, गहन विश्लेषण से व्यापक, परस्पर जुड़े नेटवर्क की पहचान हुई जिससे कार्रवाई का दायरा काफी बढ़ गया। आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79 मध्यस्थों (सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेबसाइट, आईएसपी) को उपयोगकर्ता द्वारा निर्मित, तृतीय-पक्ष (थर्ड पार्टी) सामग्री के लिए कानूनी दायित्व से ‘सुरक्षित आश्रय’ संरक्षण प्रदान करती है बशर्ते वे तटस्थ मेजबान के रूप में कार्य करें, उचित सावधानी बरतें और वास्तविक जानकारी या सरकारी आदेश प्राप्त होने पर गैर-कानूनी सामग्री हटा दें।
रिपोर्ट के अनुसार इस तरह के फर्जीवाड़ों की एक बड़ी संख्या दक्षिण-पूर्व एशिया, विशेष रूप से कंबोडिया में संगठित समूहों से उत्पन्न होती है। ये संचालन आम तौर पर समान ढर्रा प्रदर्शित करने वाले खातों के समूहों के माध्यम से संचालित होते हैं जिनमें समान नाम, दोबारा पुन: उपयोग की गई फोटो और समूहों में समन्वित गतिविधि शामिल हैं। इस तरह के कारनामों की काट निकालने के लिए व्हाट्सऐप ने प्रोफाइल फोटो में आधिकारिक लोगो और प्रतीक चिह्नों के बेजा इस्तेमाल का पता लगाने में सक्षम स्वचालित उपकरणों के साथ-साथ प्रतिरूपण पैटर्न को चिह्नित करने के लिए तैयार किए गए लार्ज लैंग्वेज मॉडल-आधारित प्रणाली तैनात किए हैं।
जनवरी 2026 से जिन खातों को लेकर आगाह किया गया हैं उनके डिस्प्ले नाम दर्ज करने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है ताकि पहचान छिपाने की क्षमता में सुधार हो सके। प्रोफाइल फोटो, नाम और विवरण सहित ज्ञात फर्जी खातों का एक डेटाबेस बार-बार अपराध करने वालों की पहचान करने के लिए उपयोग किया जा रहा है। उपयोगकर्ताओं से जुड़े सुरक्षा उपाय भी मजबूत किए जा रहे हैं। इनमें अज्ञात संपर्कों से संदेशों के लिए अलर्ट, जितने समय से खाते सक्रिय थे उसकी जानकारी, संदिग्ध नंबरों से जुड़ी प्रोफाइल फोटो छुपाना और बातचीत के दौरान रीयल-टाइम पहचान प्रणाली शामिल हैं। व्हाट्सऐप ने आगे बताया कि वह दूरसंचार विभाग द्वारा 28 नवंबर 2025 को जारी निर्देश के अनुसार सिम-बाइंडिंग से जुड़ी बातें लागू करने की दिशा में काम कर रहा है जिसके चार से छह महीनों के भीतर शुरू होने की उम्मीद है।
उपकरण (डिवाइस)-आधारित जोखिम पहचान प्रणाली पहले से ही प्रभाव में है और धोखाधड़ी से जुड़े डिवाइस आइडेंटिफायर (डिवाइस आईडी) को ब्लॉक करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। डेटा संरक्षण के संबंध में प्लेटफॉर्म ने जांच एजेंसियों का समर्थन करने के लिए आईटी नियम, 2021 के नियम 3(1)(एच) के अनुपालन में हटाए गए खातों के रिकॉर्ड को कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखने पर सहमति व्यक्त की है। यह एपीके फाइलों का पता लगाने और लंबे समय तक चलने वाली धोखाधड़ी वाली कॉल से निपटने के उपायों सहित अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की भी जांच कर रहा है।
रिपोर्ट में अलग से बताया गया है कि दूरसंचार विभाग प्रस्तावित दूरसंचार (उपयोगकर्ता पहचान) नियमों को अधिसूचित करने पर काम कर रहा है साथ ही एक बायोमेट्रिक पहचान सत्यापन प्रणाली भी विकसित कर रहा है जिसका उद्देश्य सिम जारी करने की प्रक्रिया पर पूरे देश में नजर रखना है। इस ढांचे को तीन महीने के भीतर अधिसूचित किए जाने और अगले छह महीनों में लागू किए जाने की उम्मीद है और दिसंबर 2026 से पहले इसका पूर्ण क्रियान्वयन होने का अनुमान है।