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लेखक : बीएस संपादकीय

आज का अखबार, लेख

भारतीय सेना: क्षमता विकसित करने में तेजी की दरकार

दिल्ली में पिछले पखवाड़े भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के सालाना आयोजन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रक्षा उद्योग के शीर्ष लोगों से यह विनती करते नजर आए कि वे भविष्य की तकनीकों पर काम करें ताकि भारत को एक ‘अनुयायी से नेतृत्वकर्ता’ में बदला जा सके। यह पहला अवसर नहीं था जब उन्होंने ऐसा किया। […]

आज का अखबार, लेख

Odisha train accident: खतरे के संकेत

ओडिशा में हुए दशक के सबसे बड़े रेल हादसे ने भारतीय रेलवे की गलत प्राथमिकताओं की समस्या को एक बार फिर रेखांकित कर दिया है। वह समस्या है सुरक्षा और रखरखाव के बजाय वंदे भारत ट्रेन और बुलेट ट्रेन परियोजनाओं में निवेश को तरजीह देना। यद्यपि अभी विस्तृत रिपोर्ट की प्रतीक्षा है लेकिन रेल मंत्री […]

आज का अखबार, लेख

हरित अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव लाने वाली पहल

जिस सप्ताह नए संसद भवन का उद्घाटन हुआ उसी समय भारत की शीर्ष तेल निर्यातक कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) की तरफ से ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी घोषणा हुई। ओएनजीसी ने कहा कि वह वर्ष 2030 तक स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में 1 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना को कार्य […]

अर्थव्यवस्था, आज का अखबार, लेख

आर्थिक वृद्धि के आंकड़े: बेहतर प्रदर्शन पर कुछ सवाल

जनवरी-मार्च तिमाही तथा 2022-23 के पूरे वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के आंकड़े सुखद आश्चर्य लेकर आए हैं। ये आंकड़े मुझ समेत सभी विश्लेषकों के पूर्वानुमानों से बेहतर हैं। ध्यान रहे कि गत दिसंबर में अपनी बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अनुमान जताया था कि जनवरी-मार्च तिमाही […]

आज का अखबार, लेख

सेबी के इस बड़े कदम से अब बढ़ेगी पारदर्शिता

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक मशविरा पत्र जारी किया है। यह पत्र न्यूनतम सार्वजनिक अंशधारिता (MPS) को संभावित रूप से निष्फल बनाने तथा प्रेस नोट 3 (पीएन3) को विफल बनाने के लिए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) मार्ग का दुरुपयोग रोकने के मकसद से एफपीआई द्वारा अतिरिक्त खुलासे जरूरी बनाने के विषय पर […]

अर्थव्यवस्था, आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख, संपादकीय

2022-23 में भारत के प्रदर्शन में सुधार, चुनौती बरकरार

वर्ष 2022-23 में भारत के आ​र्थिक प्रदर्शन ने बाजार को चौंका दिया। राष्ट्रीय सां​ख्यिकी कार्यालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़े बताते हैं कि 2022-23 में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 7.2 फीसदी बढ़ा। पहले इसमें 7 फीसदी वृद्धि के अनुमान लगाए गए थे। वृद्धि के अनुमान से बेहतर आंकड़े मोटे तौर पर वित्त वर्ष […]

आज का अखबार, लेख

जैव-ईंधन का अर्थशास्त्र

सरकार ने पेट्रोल में एथनॉल की मात्रा बढ़ाकर 20 प्रतिशत (ई20) करने की समयसीमा अब 2025 कर दी है। पहले उसने 2030 तक यह लक्ष्य हासिल करने की योजना बनाई थी। सरकार को अपने इस निर्णय पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। नीतियों का विश्लेषण करने वाली निजी संस्था ऑर्कस ने पिछले सप्ताह […]

आज का अखबार, लेख

US Debt Crisis: जोखिम मुक्त नहीं ऋण सीमा बढ़ाना

अमेरिका में जो बाइडन प्रशासन और अमेरिकी संसद के निचले सदन (प्रतिनिधि) सभा के अध्यक्ष ने घोषणा की है कि वे ऋण सीमा बढ़ाने पर ‘सैद्धांतिक रूप’ से सहमत हो गए हैं। प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों का बहुमत है। अमेरिका में सरकार वैधानिक रूप से तय एक सीमा से अधिक ऋण नहीं […]

आज का अखबार, लेख

सूचीबद्ध होने में लगने वाला समय कम करने के लिए ‘सूचीबद्धता समयसीमा’

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सार्वजनिक निर्गमों के सूचीबद्ध होने में लगने वाला समय कम करने के संबंध में एक विमर्श पत्र जारी किया है। इस विमर्श पत्र के अनुसार सेबी का मानना है कि अगर सूचीबद्धता प्रक्रिया वर्तमान में टी+6 दिनों (टी निर्गम बंद होने की तिथि है) से घटाकर टी+3 कार्य […]

आज का अखबार, लेख

प्राप्ति योग्य लक्ष्य या मरीचिका ?

नरेंद्र मोदी सरकार ने यह लक्ष्य रखा है कि 2047 के पहले देश को ‘विकसित राष्ट्र’ का दर्जा दिलाना है। प्राथमिक तौर पर यह लक्ष्य बहुत ऊंचा नजर आता है और किसी को भी उचित ही यह आश्चर्य हो सकता है कि क्या 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने या इसी समय तक जीडीपी […]

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