बड़ों बड़ों की जेब हुई ढह्वीली
अमेरिका में हुए सब प्राइम संकट की आग काफी दूर तक फैल चुकी है और इस आग में इस साल निवेशकों का 20 खरब डॉलर फुंक जाने के बावजूद फिलहाल इसकी आंच में कोई कमी आने की संभावना नहीं दिख रही है। इस दशक में यह दूसरी बार हुआ है कि इक्विटी में निवेश करने […]
कर्ज संकट ने दुनिया भर को हिला डह्ला
वैश्विक क्रेडिट संकट के कारण विश्व केसभी बाजारों का बेंचमार्क सूचकांक 30 सितंबर 2008 को 52 सप्प्ताहों के अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। इसकेपरिणाम स्वरूप विश्व की अर्थव्यवस्था में ठहराव सा आ गया। पूरे विश्व में कारोबार पर क्र ेडिट संकट का असर कितना पड़ा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता […]
खट्टे भी हो सकते हैं अमेरिकी अंगूर
भारत ने अमेरिका के साथ परमाणु संधि तो कर ली है। लेकिन यह संधि भारत के लिए नई मुसीबतों का सफर भी साबित हो सकती है। अमेरिका का इतिहास सदैव ही साम्राज्यवादी और अपनी सामरिक नीतियों को दूसरे देशों पर थोपने वाला रहा है। इस परमाणु संधि का प्रयोग अमेरिका अपनी सामरिक इच्छाओं की पूर्ति […]
एचसीएल के हक में आई बाजी
ब्रिटेन स्थित सलाहकार कंपनी एक्सॉन की खरीद मामले में भारत की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इन्फोसिस को कड़ा झटका लगा है। एक्सॉन कंपनी के बोर्ड ने गुरुवार को कंपनी खरीद के मामले में इन्फोसिस की बोली के बजाए अन्य भारतीय आईटी कंपनी एचसीएल टेक्नोलॉजी की बोली को स्वीकार किया है। कंपनी का कहना है कि […]
तो क्या साकार होगा बापू का सपना!
किसी भी तरह के नशे की सख्त मुखालफत करने वाले महात्मा गांधी के 139वें जन्मदिवस से देशभर में सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने पर लगी पाबंदी की शुरुआत हो गई। पहले दिन (2 अक्टूबर) सिगरेट विक्रेता और इसका सेवन करने वाले भले ही उदासीन नजर आए, लेकिन राज्य सरकारें इस नए कानून को सख्ती से […]
बढ़ रही है गांधी का फलसफा सीखने वालों की तादाद
सूचना तकनीक के बढ़ते दौर में किताबों के पाठकों की संख्या में कमी भी आ रही है। लेकिन अगर प्रकाशकों की माने तो गांधी जी की रचनाओं की मांग लगातार बनी हुई है। लेकिन एक सच यह भी है कि इन किताबों की मांग ज्यादातर किसी सामाजिक सरोकार से जुड़े संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और शोध […]
आज भी चलता है चरखा गूंजते हैं जीवन के राग
चंडीगढ़ वैसे तो चौड़ी सड़कों और चारों तरफ पसरी हरियाली के लिए मशहूर है लेकिन इसके बावजूद यहां कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके पास अपना चरखा है और वे सेक्टर 16 में गांधी स्मारक भवन में गांधी जयंती मनाने के लिए एकत्रित होते हैं। गांधी स्मारक भवन के निदेशक आर एस रावत ने बिज़नेस […]
डाक टिकटों की दुनिया में भी छाया है बापू का जादू
‘आने वाली पीढ़ियां शायद ही इस बात का यकीन कर पाएं कि कभी धरती पर गांधी जैसा कोई शख्स भी पैदा हुआ था।’ – अलबर्ट आइंस्टीन, गांधी की मृत्यु पर आज से 60 साल पहले ही दुनिया यह बात जान गई थी कि आने वाली पीढ़ियों को गांधी के बारे में, उनके विचारों के बारे […]
इनके बिना कैसी आजादी और कैसा आर्थिक विकास?
भले ही सरकार इस बात के लिए अपनी पीठ थपथपा रही हो कि पिछले कुछ सालों के दौरान देश के आर्थिक विकास में दलितों और आदिवासियों की हिस्सेदारी बढ़ी है लेकिन असंगठित, निजी और कारोबारी क्षेत्रों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की भागीदारी से संबंधित कोई भी विश्वसनीय और ताजा आंकड़े उपलब्ध नहीं है। […]
कैसे बिके साल भर खादी?
भारत सरकार की ढ़ेरों योजनाओं के बावजूद आज भी खादी सिर्फ दो अक्टूबर की छूट के बाद ही बिकती है। सवाल यह?है कि आखिर ऐसा क्या किया जाए कि खादी बाजार से जुड़े और बिना किसी सरकारी बैसाखी के साल भर लोग इसे खरीदें। खादी और ग्राम उद्योगों को विकसित करने के लिए 1955 में […]
