सरकारी मदद के भरोसे ग्रामस्वराज का सपना
स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराने के गांधी जी के सपने को आधुनिक रूप में साकार करने की पिछली सरकार की जल्दबाजी में की गई एक कोशिश को राज्य की वर्तमान सरकार पिछले चार सालों में संभाल न सकी। वर्ष 2003 में दिग्विजय सिंह सरकार ने स्थानीय स्तर पर मिलने वाले माल जैसे मसाले, पापड़, […]
आज के नजरिए से गांधी के राम राज्य की खोज
वैश्विक अर्थव्यवस्था और विश्वव्यापी आतंकवाद के इस दौर में न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के तमाम देश सुशासन के लिए गांधी की ओर बड़ी उत्सुकता के साथ देख रहे हैं। गांधी आदर्श समाज व्यवस्था के लिए राम राज्य की अवधारणा पर जोर देते हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि ‘राम राज्य’ एक मात्र हिंदी फिल्म […]
तू निंदनीय जग का, चाहे रहे छिपा नित्य
भारतीय किसान का नाम आते ही परिश्रम, सेवा और त्याग की सजीव मूर्ति मन में उभरने लगती है। किसान संसार का अन्नदाता है। सुबह से लेकर सूरज डूबने तक वह लगातार काम करता है, ताकि सभी लोगों का पेट भर सके। खुद भूखा रहकर भी वह परिश्रमरत रहता है। किसी ने किसान की प्रशंसा में […]
…ताकि किसान भी जुटा सके धन
भविष्य को संवारने और समृद्ध करने के सपने कौन नहीं देखता? गांव में रह कर मजदूरी कर अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने वाला मजदूर भी अपनी बिटिया की शादी और भविष्य संवारने के सपने देखता है। साहूकारों के कर्ज का ब्याज चुकाने के बाद अगर कुछ बच जाए तो भविष्य के […]
जो देखा था कल सपना आज पूरा होगा वो अपना
किसान जहां देश का पेट पालते हैं, वहीं जवान देश की हिफाजत करते हैं। शास्त्री जी ‘जवानों’ की अहमियत भी जानते थे, इसलिए उन्होंने किसानों के साथ–साथ जवानों को भी उतनी ही तवज्जो दी है। जानते भी क्यों नहीं एक नये आजाद देश ने अपनी आजादी के तकरीबन 15 साल बाद ही एक पड़ोसी का […]
एक और अच्छा मानसून
दुनिया की प्रमुख मौसम प्रणालियों में भारतीय मानसून शायद ही पूरी तरह से कभी विफल रहा हो। भीषण सूखे के वर्षों में भी कुछ राज्यों में बेहतर बारिश हुई है। कई बार जिन सालों में देश के कई हिस्सों में अच्छा मानसून आया, उसी दौरान कुछ हिस्से बारिश के लिए तरस गए। कुछ ऐसा ही […]
आखिर क्यों नहीं बन पाती ब्रांडों की पहचान
दुनिया भर के बड़े ब्रांड एक के बाद एक धराशायी हो रहे हैं और सुर्खियों में शुमार हो रहे हैं। हाल ही में अमेरिका में सब प्राइम संकट की वजह से हमने मेरिल लिंच और लीमन ब्रदर्स जैसे चोटी के वित्तीय ब्रांडों को ढहते देखा। कुछ ऐसा ही हाल एआईजी का भी हुआ था जिसे […]
भुगतान का संकट और नियमों की जटिलता
बीमा कंपनियां, भविष्य निधि प्रबंधक, पोस्ट ऑफिस , रेलवे और अन्य सरकारी विभाग परंपरा का पालन करते हुए देय भुगतानों के लिए अग्रिम रसीद की मांग करते हैं जिन पर तारीख नहीं होती है। यहां तक कि कुछ कार्पोरेट घराने भी इस परिपाटी का पालन करते हैं। प्रशासनिक अनिवार्यता और एकाउंटिंग की जरूरतों को देखते […]
कहीं धुएं में ही न उड़ जाए कानून
अंशिका शर्मा (बदला हुआ नाम) नई दिल्ली में एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार में काम करती हैं। जब भी उन पर काम का ज्यादा दबाव होता था, वह कनॉट प्लेस स्थित अपने दफ्तर के पिछले हिस्से में सिगरेट पीने के लिए निकल जाती थीं। लेकिन अब वह ऐसा नहीं कर पाएंगी। वजह है, गुरुवार से सार्वजनिक […]
डाटा चोरों ने मुश्किल किया जीना
आज हम सभी की जिंदगी में कंप्यूटर एक जरूरत बन चुका है। घर हो या ऑफिस, हर जगह आपको कंप्यूटर की जरूरत पड़ती है। हममें से कई सारे लोग–बाग अपनी जिंदगी की जरूरी जानकारियों को भी उसमें स्टोर रखते हैें। जमाने के हाईटेक होने के साथ–साथ अब चोर भी हाईटेक होने लगे हैं। वे आपके […]
