त्योहारी सीजन के लिए 52 लाख टन चीनी
त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अक्टूबर–दिसंबर की तिमाही केलिए 52 लाख टन गैर–लेवी चीनी उपलब्ध कराने का फैसला किया है। खाद्य मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि पिछले साल इस दौरान 42 लाख टन चीनी उपलब्ध कराया गया था। पिछले महीने के दो लाख टन बगैर […]
वायदा कारोबार में संयोजकों की भागीदारी पर सवालिया निशान
नैशनल कमोडिटी एंड डेरिवैटिव एक्सचेंज ने सरकार से मांग की है कि वह उन जिंसों के वायदा कारोबार पर पाबंदी न लगाए जाने की गारंटी दे जिसमें कि किसानों के समूह की ओर से एग्रीगेटर (संयोजक) निवेश या खरीद–बिक्री करना चाहते हैं। इसके बाद कमोडिटी एक्सचेंजों में संयोजकों की भागीदारी पर सवालिया निशान लग गया […]
इलिक्विड सौदों को बंद करने की योजना नहीं ः खटुआ
आसानी से भुनाए न जाने वाले सौदों (इलिक्विड कांट्रैक्ट्स) को कामयाब बनाने के लिए सख्त कदम उठाने के वायदा बाजार आयोग के निर्देश का जवाब देने के लिए कमोडिटी एक्सचेंजों को 15 दिन का समय दिया गया है। वैसे एफएमसी के अध्यक्ष बी. सी. खटुआ ने साफ कर दिया है कि ऐसे किसी अनुबंध को […]
होंडा भारत को बनाएगी पुर्जा आपूर्ति का अड्डा
जापान की दिग्गज कार निर्माता कंपनी होंडा मोटर्स भारत को कार उत्पादन के मामले में अपना केंद्र बनाने से चाहे हिचक रही हो, लेकिन कलपुर्जों के लिए वह इसी को अपना अड्डा बना रही है। राजस्थान में कंपनी का नया संयंत्र विदेशों को आपूर्ति के लिए कार के मुख्य पुर्जे तैयार करेगा। जापानी कंपनी की […]
आईटी के बाजार में क्या करेगा प्रचार!
भारत की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों को भी मंदी की तलवार से तो जूझना पड़ रहा है, लेकिन दूसरे क्षेत्रों की तरह इस मैदान के खिलाड़ी प्रचार पर बहुत ज्यादा खर्च करने के लिए तैयार नहीं होते। देश की प्रमुख आईटी कंपनियों से मिले आकड़ों पर नजर डालें, तो पता चलेगा कि पिछले तीन से […]
काम बहुत करने हैं, गांधी हैं सहारा
आजादी के इतने साल बीतने के बाद भी सभी को न्याय नहीं मिल सका है। अमीर और गरीब के बीच की खाईर् बढ़ी है। ऐसे ही और मसलों के साथ शिखा शालिनी ने केंद्रीय सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्री मीरा कुमार से बातचीत की। सामाजिक विषमता को दूर करने का गांधी जी का सपना कितना […]
नए रंग में रंगने के लिए तैयार है बापू की खादी
खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (केवीआईसी) 1957 में अपनी स्थापना के बाद से ही ग्रामीण इलाकों में खादी और अन्य उद्योगों के विकास के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के कार्यान्वयन, प्रोत्साहन आदि में लगा हुआ है। आयोग ने ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के प्रति जागरूकता पैदा करने के क्रम में युवाओं के लिए आत्मनिर्भर और ग्रामोद्योग गतिविधियां […]
आर्थिक आजादी
मुझे याद नहीं पड़ता कि 1908 से पहले मैंने चरखा या करधा कहीं देखा हो। फिर भी मैंने हिंद स्वराज में यह माना था कि चरखे के जरिए हिंदुस्तान की कंगालियत मिट सकती है। और यह तो सबके समझ सकने जैसी बात है कि जिस रास्ते भुखमरी मिटेगी उसी रास्ते स्वराज्य मिलेगा। आश्रम में हम […]
राष्ट्र पिता तुम्हें नमन
हमें खुद में वही बदलाव लाना चाहिए, जिसे हम दूसरों में देखना चाहते हैं।’ – महात्मा गांधी महात्मा गांधी के इन्हीं शब्दों का असर शायद आज देश के कॉर्पोरेट जगत पर भी देखा जा रहा है। उन्हें बदलते भारत का इंतजार है। और भारत को इंतजार है कॉर्पोरेट जगत की सोच बदलने का कि आखिर […]
एफएमसीजीः बेहतर स्थिति
एफएमसीजी कंपनियों का प्रदर्शन जून 2008 की तिमाही में कीमतों के लिहाज से कठिन माहौल में कारोबार करने के बावजूद बेहतर रहा। मॉर्गन स्टेनली ब्रोकरेज केद्वारा जिन कंपनियों का अध्ययन किया गया उनमें कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर वॉल्यूम और संतुलित कीमतों के कारण 20 प्रतिशत ऊपर रहा। हालांकि रियालाइजेशन केकाफी ऊपर होने से कीमतों में […]
