मंदी की मार.. मकान के साथ कार!
देश भर के संपत्ति कारोबारी महंगाई और मंदी से बेजार होकर अब ग्राहकों को लुभाने के लिए अनूठी पेशकश करने लगे हैं। इसकी शुरुआत बेंगलुरु से हो चुकी है। संपत्ति बेचने वाली कंपनियां खरीदारों को कार, जीवनशैली से जुड़ी सुविधाएं मुफ्त में देने और क्लबहाउस की सदस्यता देने तक की पेशकश कर रही हैं। संपत्ति […]
किया लाख जतन, फिर भी महंगाई नहीं हुई कम
सरकार चाहे लाख कोशिश कर ले, लेकिन मुद्रास्फीति की दर में कमी लाना फिलहाल संभव नजर नहीं आ रहा है। देश के थोक मूल्य सूचकांक में दाल का योगदान 0.6 फीसदी, फल व सब्जी का 2.9 फीसदी, अंडे व मीट का 2.2 फीसदी तो चीनी का 3.6 फीसदी है। बीते एक माह के भीतर इन […]
मजबूत रही कच्चे तेल की धार
कच्चे तेल की कीमतों में चौथे दिन भी तेजी रही। जैसे-जैसे गुस्ताव का रुख मेक्सिको की खाड़ी स्थित उत्पादन प्लेटफार्म की तरफ हो रहा है, ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह कैटरीना तूफान से ज्यादा कहीं क्षति पहुंचा सकता है। नैशनल हरीकेन सेंटर ने कहा है कि 1 सितंबर को दिन के 2 […]
अब पछताए होत क्या, जब…
बाढ़ रातोंरात नहीं आती है। सबसे पहले भारी बारिश सरकार को संकेत देती है कि ‘भईया सावधान हो जाओ। राहत और बचाव की कुछ तो तैयारी कर लो।’ फिर नदियों के जल स्तर का बढ़ना शुरू होता है। इस स्तर पर भी कुछ तैयारी हो जाए तो जानमाल के नुकसान से काफी हद तक बचा […]
सब निगल गई कोसी
बिहार में कोसी नदी ने अपनी राह क्या बदली, मधेपुरा जिले के राकेश कुमार सिंह का तो सबकुछ लुट गया। कोसी की उफनती रफ्तार ने उनकी लाडली बेटी और उनकी मां को निगल लिया। काफी मुश्किल से वह अपनी पत्नी और अपने बेटे को बचाए पाए। अब उन्होंने रोना बंद कर दिया है। इसलिए नहीं […]
चिट्ठी न कोई संदेश, जाने…
विलायत अकेला हो गया है। कल तक उसके परिवार में 15 लोग थे, मां थी, बच्चे थे, पत्नी थी और भाई भी था। अपने घर बिहार के सुपौल जिले से कोसों दूर वह इसी परिवार की खुशियों को संजोए रखने के लिए दिल्ली में रेहड़ी लगाकर फल बेचा करता है। जैसे-तैसे कुछ पैसे जमाकर वह […]
लालू का भी पसीजा दिल
कोसी के कहर से उत्तरी बिहार के लोगों को बचाने के लिए रेल मंत्री लालू प्रसाद ने ‘क्या आप पांचवीं पास से ज्यादा तेज है?’ में जीते गए 1 करोड़ रुपये दान में दे दिए हैं। मध्यपूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ए के चंद्रा ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि रेल मंत्री ने यह […]
‘न तो बाढ़ पर लगाम लगती है और न ही विकास के वादे पूरे होते हैं’
‘बिहार में जैसे हर साल बाढ़ आती है, वैसे ही विकास के वादे भी हर साल किए जाते हैं। लेकिन न तो बाढ़ आनी रुकती है और न ही विकास के वादे पूरे होते हैं।’ यह कहना है बिहार में इस वक्त बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में से एक, अररिया के निवासी शंकर […]
मंदी से उबरने के लिए जादुई छड़ी नहीं
भले ही पिछले कुछ समय से कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग थोड़ी ठंडी हुई है पर इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को कोई राहत नहीं मिली है। अगर अमेरिका की बात करें तो वहां वित्तीय पैकेज में कुछ ऐसे उपाय किए गए थे जिनसे अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके। इनमें कर में छूट […]
दम तोड़ना भी नहीं आसान खस्ताहाल कंपनियों का
जब कोई खस्ताहाल कंपनी बंद होने के कगार पर पहुंचती है तो उस पर ताला लगाए जाने से पहले कई ऐसी कानूनी अड़चनें आती हैं जो उसे जकड़ने लगती है। औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड (बीआईएफआर) की जो प्रक्रियाएं होती हैं वह अपने आप में काफी लंबी और खीझ दिलाने वाली होती हैं। लेनदारों में […]
