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लेखक : कनिका दत्ता

आज का अखबार, लेख

जिंदगीनामा: तबाही की फसल…..चुनाव की खातिर मुफ्त बिजली और पानी!

चुनाव की खातिर मुफ्त उपहारों और सब्सिडी (Freebies) तथा पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के खेतों में आग लगाए जाने की घटनाओं के बीच कोई रिश्ता एकदम नहीं नजर आता है लेकिन यह केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की नाकामी ही है कि किसानों को नि:शुल्क बिजली-पानी, रियायती दर पर उर्वरक और तयशुदा खरीद मूल्य […]

आज का अखबार, लेख

भारत से बढ़ता दोहरा प्रतिभा पलायन

आईबीएम के सीईओ और चेयरमैन अरविंद कृष्णा ने हाल में कहा कि वह कंपनी के भारत स्थित आर ऐंड डी सेंटर में विकसित हो रहे नवाचारों को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इस बात पर हम अपनी देसी तकनीकी विशेषज्ञता पर खुद की पीठ थपथपा सकते हैं। असल में भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियां सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशल […]

आज का अखबार, लेख

कारोबार में सरकार के हस्तक्षेप से लक्ष्य नहीं हुए पूरे

इत्र, प्रसाधन सामग्री, छाता, खिलौने, नकली गहने, सौर उपकरण, मोबाइल फोन जैसी कई वस्तुओं ने पिछले 10 वर्षों के दौरान नरेंद्र मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का ध्यान आकृष्ट किया है। इनके अलावा 2016 से हुए घटनाक्रम पर विचार करते हैं, जो अलग-अलग प्रभाव छोड़ गए हैं या देश में कारोबारी माहौल को […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: स्टार्टअप इकाइयों के प्रोमोटर कम सुरक्षित

भारत में उद्योग-प्रतिष्ठान अधिकांश परिवार नियंत्रित एवं प्रबंधित हैं। स्टार्टअप इकाइयों (Startup Companies) के साथ भी यह बात लागू होती है जहां मित्रों एवं परिवारों द्वारा कारोबार का प्रबंधन इनकी विशिष्ट पहचान होती है। इसके बावजूद दोनों को संचालित करने वाले निवेशकों की धारणा बहुत अलग है। परिवार-प्रबंधित इकाइयों के कुछ प्रवर्तक-प्रबंधक कुप्रबंधन के आरोप […]

आज का अखबार, लेख

Patriarchy: पितृसत्ता के चंगुल में खेल संगठन व संस्थान

इस समय जबकि दिल्ली पुलिस सांसद बृजभूषण शरण सिंह से निपटने की समस्या से जूझ रही है, भारतीय समाज में पैबस्त पितृसत्तात्मक ढांचा खुलकर देखने को मिल रहा है। मौजूदा विवाद इस बात को रेखांकित करता है कि सत्ता के साथ घालमेल के बाद जन्मजात अंधराष्ट्रवाद बहुत विषाक्त रूप ले लेता है। कैसरगंज के सांसद […]

आज का अखबार, लेख

महिला सुरक्षा अधिकारों की पोल खोलता पहलवानों का यौन उत्पीड़न को लेकर विरोध

कार्यस्थलों पर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए विधान को अस्तित्व में आए 10 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। तब बलात्कार की परिभाषा व्यापक बनाने के लिए आपराधिक विधानों में भी पहली बार संशोधन किए गए थे और दंड से जुड़े प्रावधान सख्त बना दिए गए थे। हालांकि, इन सख्त प्रावधानों के […]

आज का अखबार, लेख

निजी क्षेत्र में वंचितों को अवसर

इस साल भारत में चुनावों का दौर जारी रहने वाला है। ऐसे में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में उच्च कोटे की मांगों में और तेजी आने की उम्मीद है क्योंकि कई समुदायों में अचानक ही अपने पिछड़ेपन का भान होने लगा है। कुछ साल पहले, ऐसी मांग करने वालों में पटेल, मराठा और जाट […]

आज का अखबार, लेख

‘पीरियड लीव’ पर चर्चा आवश्यक

मासिक धर्म के दौरान अवकाश (पीरियड लीव) के प्रावधान पर बहस तेज हो गई है। क्या कंपनियों को अपनी महिला कर्मचारियों को पीरियड लीव देनी चाहिए? भारत में इस प्रश्न का उत्तर कई विषयों-सामाजिक संरचना, पुरुष कर्मचारियों के रवैये और महिलाओं की निजता का आदर-पर निर्भर करता है। पिछले कई दशकों से कार्यबल में महिलाओं […]

आज का अखबार, लेख

सभी सरकारें सांठगांठ वाले पूंजीवाद को देती हैं प्रश्रय

राजनीतिक विचारधारा के आधार पर ही अदाणी मामले को लेकर अलग-अलग लोगों में गुस्सा, खुशी, व्याकुलता और शर्मिंदगी जैसे अलग-अलग भाव देखने को मिले। राहुल गांधी को भी एक सहज मुद्दा मिल गया जिसके आधार पर वह भारत जोड़ो यात्रा के दौरान बनी अपनी छवि को मजबूत कर सकते थे। उन्होंने यह सुनि​श्चित किया कि […]

आज का अखबार, लेख

वैश्विक संपत्ति और भारतीय व्यापार

मुकेश अंबानी या गौतम अदाणी के बारे में मीडिया में दिए गए संदर्भों में शायद ही कभी उनकी संपत्ति का उल्लेख होता है। मीडिया हमें याद दिलाती है कि अदाणी, भारत के सबसे अमीर व्यक्ति और फोर्ब्स की ‘रियल टाइम बिलियनेयर्स’ सूची में दुनिया के तीसरे सबसे अमीर अरबपति हैं। अंबानी भारत के दूसरे सबसे […]

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