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लेखक : कनिका दत्ता

आज का अखबार, लेख

कॉकरोच जनता पार्टी की रैली से उठे सवाल: युवा असहमति, राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं

कुछ समय पहले दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित रैली ने देश की राजनीति की अन्यथा उदासीन और कमोबेश निष्क्रिय हालत में थोड़ी हलचल पैदा कर दी है। मौजूदा हालात ऐसे हैं कि सत्तारूढ़ दल किसी भी तरह से जीतने की कोशिश करता है और हारने वाले तुरंत जीतने वाली पार्टी में शामिल […]

आज का अखबार, लेख

भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते में देरी उचित नहीं, यूरोपीय देशों के कड़े रुख से भारतीय उद्योगों के सामने नया संकट

इस समाचार पत्र में गत सप्ताह यह खबर प्रकाशित हुई थी कि हाल ही में ब्रिटेन के साथ हुए हमारे अहम मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के क्रियान्वयन में देरी हो सकती है क्योंकि ब्रिटेन ने सभी प्रकार के इस्पात आयात पर नए प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। उसने हाल ही में यह घोषणा की […]

आज का अखबार, लेख

संकट को अवसर में बदलें: युद्ध से सबक लेकर भारत को अपनी आर्थिक नीतियां सुधारने की जरूरत

संकट प्रबंधन के मामले में भारत सरकार का प्रदर्शन मिलाजुला रहा है। कुछ आपात स्थितियों से निपटने के वर्षों के अनुभव ने प्रशासनिक तंत्र को प्रबंधन के उपाय पहले से ही कर लेने की कला सिखाई है। नतीजतन भारत में सूखे की मार अब उतनी गंभीर रूप से नहीं पड़ती (जैसा कि इस वर्ष पड़ने […]

आज का अखबार, लेख

स्थानीय नौकरियों में कोटा: भारत में उभरती ‘स्थानीयतावादी राजनीति’ की खतरनाक नई लहर

भारतीय नागरिकों की एकता का सबसे सशक्त संकेत छह साल पहले कोविड-19 लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में सामने आया, जब ​​दुकानें और कारखाने बंद हो गए तथा निर्माण स्थलों पर काम ठप हो गया। हजारों मजदूर और उनके परिवार सड़कों पर उतर आए। रोजगारदाताओं और मकान मालिकों द्वारा जबरन बेदखल किए जाने के बाद उन्हें […]

आज का अखबार, लेख

व्यापार समझौते अवसर लाए, लेकिन भारत अब भी निवेश के लिए पूरी तरह तैयार नहीं

दो महत्त्वपूर्ण व्यापार समझौतों में सफलता मिलने के बाद आधिकारिक तौर पर यह माना जा रहा है कि भारत आर्थिक रूप से अनुकूल स्थिति में है, या उसके आसपास कहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति के बदलते रुख के कारण उम्मीद है कि भारत को वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कपड़ा, चमड़ा […]

आज का अखबार, लेख

होटल और क्यों बनाएं, जब उत्तराखंड बन सकता है भारत का स्किल्स इंजन

उत्तराखंड में ‘शीतकालीन चार धाम’ का दूसरा सीजन शुरू हो गया है। यह राज्य सरकार का धार्मिक पर्यटन को पूर्ण रूप से बढ़ावा देने और इस कारोबार से होने वाली आय को अधिकतम करने का एक तरीका है। पिछले साल लगभग 30,000 तीर्थयात्रियों ने हिमालय की निचली श्रेणियों की घाटी में मौजूद देवी-देवताओं के शीतकालीन […]

लेख, विविध

क्या AI छीन लेगी पत्रकारों की नौकरी? रिपोर्टर बनाम रोबोट की जंग तेज!

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के कारण बड़ी संख्या में रोजगार खत्म होने का खतरा भयावह वास्तविकता लग रहा है, खासकर जब आप बड़ी टेक कंपनियों, बैंकिंग, बीमा, उच्च-स्तरीय विनिर्माण और यहां तक कि पर्यटन एवं होटल उद्योगों में छंटनी और नियुक्तियों में मंदी की रफ्तार पर गौर करते हैं। बदलाव की इस तेज गति ने दुनिया […]

आज का अखबार, लेख

स्वदेशी की मियाद खत्म: भारतीय व्यवसायों को सफल होने के लिए प्रतिस्पर्धा करना सीखना होगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी उत्पाद खरीदने के आह्वान के बाद ‘व्हाट्सऐप अंकल’ सक्रिय हो गए हैं। माफ कीजिए, शायद हमें उन्हें ‘अरटई अंकल’ कहना चाहिए जो एक स्वदेशी मेसेजिंग और कॉलिंग ऐप है जिसे वे व्हाट्सऐप समूहों के सदस्यों को इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। ऐसे ही एक समूह के कुछ […]

आज का अखबार, लेख

फीकी पड़ती चाय: जलवायु परिवर्तन भारत को श्रीलंका और नेपाल की चाय की ओर धकेल सकता है

अगर आप चाय के शौकीन हैं और दूध-शक्कर वाली चाय की बजाय दार्जिलिंग या असम की खूशबूदार काली चाय पसंद करते हैं तब आपको श्रीलंका में चाय की बहुत कमी महसूस होगी। हाल ही में श्रीलंका की यात्रा के दौरान मैंने यह बात महसूस की। हालांकि, यह छोटा सा हरा-भरा द्वीप देश, चाय के निर्यात […]

आज का अखबार, लेख

CSR खर्च में बढ़ोतरी, फिर भी कॉरपोरेट की प्रतिष्ठा में मामूली सुधार

देश में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की दूसरी पारी के दौरान वर्ष 2013 में अनूठे कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कानून की पेशकश की गई थी। यह कानून तब लाया गया था जब कंपनियों की छवि कुछ खराब हो रही थी। उस समय अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता, ओडिशा के एक आदिवासी इलाके में बॉक्साइट […]

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