बचाव, पुनरुद्धार और सुधार: IBC के पहले दशक ने भारत की क्रेडिट संस्कृति को बदला
भारत जब बाजार अर्थव्यवस्था बना कारोबारी चक्र की गतिविधियां – विस्तार, मुश्किल और विफलता भी स्वाभाविक रूप से आ गईं। वृद्धि के दौर में बनी कई कंपनियां होड़ गहरी होने पर कदमताल नहीं कर पाईं। वे होड़ में पिछड़ गईं, आर्थिक रूप से काम की नहीं रहीं मगर निकासी की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने के […]
IBC: संकट में फंसी कंपनियों का ‘समाधान’ या कर्ज वसूली का नया ‘हथियार’?
ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी), 2016 का उद्देश्य उस तरीके में निर्णायक बदलाव करना था जिसमें कॉरपोरेट संकट के समय लेनदारों की ज्यादा चलती थी और नियमों को सख्ती से लागू करने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था। इसे एक ऐसे ढांचे के रूप में तैयार किया गया था जिसमें उन व्यवसायों को बचाया […]

