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लेखक : सुनीता नारायण

आज का अखबार, लेख

नए किस्म के पर्यावरणवाद की आवश्यकता, क्यों टिकाऊ विकास की शुरुआत समावेशिता से होनी चाहिए?

हर वर्ष 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम कहां खड़े हैं और हमें किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इस वर्ष जब मैं यह आलेख लिख रही हूं मेरा शहर दिल्ली जल रहा है। यह एक जीवित अग्निकुंड बन चुका है। हम सभी […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

जंगली जानवरों के आतंक से अरबों की फसलों का नुकसान, गंभीर होता जा रहा है मानव-वन्यजीव संघर्ष

जंगली जानवरों के आतंक से किसानों की फसलें बरबाद हो रही हैं और इससे उनके आर्थिक नुकसान में भारी बढ़ोतरी हो रही है। इस कारण देश के कई हिस्सों में खेती करना मुश्किल होता जा रहा है। अब यह संघर्ष सिर्फ बाघ, हाथी और तेंदुए जैसे बड़े जानवरों तक सीमित नहीं रहा है बल्कि जंगली […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

अमेरिका-ईरान युद्ध ने दुनिया भर में ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों का लाया सामने

अमेरिका और इजरायल ने ईरान के विरुद्ध जो विनाशकारी युद्ध छेड़ा उसने दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति में उथलपुथल पैदा कर दी है। अमीर और गरीब दोनों तरह के मुल्क अपने नागरिकों को चेतावनी दे रहे हैं कि मुश्किल समय आने वाला है। ऐसा संकट जो शायद इस पीढ़ी ने तो नहीं झेला यानी ऊर्जा (ईंधन) […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

दिल्ली से सीखें सबक: नए शहरों को ‘अराजकता’ से बचाने के लिए प्रबंधन जरूरी है, लोकलुभावनवाद नहीं

मुझे अपनी दिल्ली के लिए रोना आ रहा है। यह मेरा शहर है जहां मेरे परिवार की कई पीढ़ियां रह चुकी हैं। मैंने यहां अपने पेशेवर जीवन का अधिकांश समय स्वच्छ हवा, पानी और बुनियादी जीवनयापन के लिए आवश्यक हर चीज की वकालत करते हुए बिताया है।  आज हर जगह कूड़ा-कचरा है, सड़कों पर गड्ढे […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

प्रतिस्पर्धा से बदली दुनिया: हर देश को खुद तय करना होगा अपना भविष्य

‘पुराना जमाना खत्म हो रहा है, और नया जमाना आने के लिए जूझ रहा है। अब राक्षसों का समय है।’ इटली के दार्शनिक एंटोनियो ग्राम्शी का यह उद्धरण आज राजनीतिक-नीति जगत में अक्सर दोहराया जाता है। यह गलत नहीं है। जनवरी 2026 में मौजूदा विश्व व्यवस्था में और अधिक उथल-पुथल तथा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। […]

आज का अखबार, लेख

स्थानीयकरण और बहुसंख्यक कल्याण से बनेंगी मजबूत व लचीली अर्थव्यवस्थाएं

मेरा जन्म वैश्वीकरण से पहले हुआ और तब से दुनिया काफी बदल चुकी है। मैंने अपनी पुस्तक ‘द राइज ऑफ द नियो-लोकल्स: ए जेनरेशनल रिवर्सल ऑफ ग्लोबलाइजेशन’ में इसकी चर्चा विस्तार से की है। पुस्तक में मैंने इस बात का उल्लेख किया है कि मेरी 60 वर्षों की अब तक की जीवन यात्रा में दुनिया […]

आज का अखबार, लेख

रूफटॉप सोलर का सपना और हकीकत: रात की बिजली का खर्च आखिर कौन उठाएगा?

अब आप जैसे ही छत के बारे में सोचते हैं आपके जेहन में वहां लगे सौर पैनल की तस्वीर उभरने लगती है। आप सौर ऊर्जा की बात सोचते हैं तो आप दिन में पैदा होने वाली बिजली को देखते हैं जो उपकरणों को चलाती है और यहां तक कि ग्रिड में भी जाती है। इस […]

आज का अखबार, लेख

जलवायु संकट के मोर्चे पर दोराहे पर दुनिया: ग्रीन एनर्जी बनाम जीवाश्म ईंधन की जंग?

जब मैं यह लिख रही हूं, दुनिया भर के नेता वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप 30) के लिए एकत्रित हो रहे हैं। यह सम्मेलन दुनिया में चल रहे व्यापक उथल-पुथल के बीच आयोजित हो रहा है। एक-दूसरे के विरुद्ध काम कर रही शक्तिशाली ताकतों का टकराव देखने को मिल रहा है। सवाल यह है कि विजेता […]

आज का अखबार, लेख

जलवायु परिवर्तन नहीं सत्ता परिवर्तन असल मुद्दा!

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने वैश्विक मंच से अपनी एक अहम बात फिर रखी है। संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ पर अपने संबोधन में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन को एक ‘बड़ा धोखा’ बताया और इससे जुड़े हुए ऐसे सभी लोगों को, जिनमें हम सभी शामिल हैं, धूर्त तक कह दिया है […]

आज का अखबार, लेख

भारत कोयले के बिना नहीं चल सकता, लेकिन टेक्नोलॉजी और बायोमास से घट सकता है उत्सर्जन

जलवायु परिवर्तन और दुनिया के विकासशील देशों की ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती के बीच एक बड़ा अहम सवाल यह है कि हम कोयले और उससे बनने वाली बिजली का क्या करें? तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस​ से नीचे रखने के लिए दुनिया का कार्बन बजट तेजी से खत्म हो रहा है, […]

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