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वित्त वर्ष 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही (वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही) में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत बढ़कर 5,616 करोड़ रुपये हो गया है। लेकिन इस दौरान बैंक के गैर ब्याज आय में गिरावट आई है।
इस तिमाही में बैंक की गैर-ब्याज आय सालाना आधार पर 16.2 प्रतिशत घटकर 3,967 करोड़ रुपये रह गई। बैंक की शुद्ध ब्याज आय (अर्जित ब्याज और खर्च किए गए ब्याज के बीच का अंतर) सालाना आधार पर 8.7 प्रतिशत बढ़कर 12,494 करोड़ रुपये हो गई। बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में घटकर 3.08 प्रतिशत रह गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 3.16 प्रतिशत था।
बैंक की क्रेडिट लागत वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के 0.44 प्रतिशत की तुलना में वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में बढ़कर 0.76 प्रतिशत हो गई, जिसका कारण इस तिमाही के दौरान बैंक द्वारा किया गया 1500 करोड़ रुपये का फ्लोटिंग प्रोविजन था।
वित्त वर्ष 2026 में पूरे साल के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा का शुद्ध मुनाफा 2.2 प्रतिशत बढ़कर 20,021 करोड़ रुपये रहा है।
बैंक के घरेलू ऋण 31 मार्च, 2026 तक सालाना आधार पर 14.5 प्रतिशत बढ़कर 11.69 लाख करोड़ रुपये हो गया। इनमें से रिटेल सेग्मेंट सालाना आधार पर 17.9 प्रतिशत बढ़कर लगभग 3.03 लाख करोड़ रुपये हो गया, कॉरपोरेट ऋण सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत बढ़कर 4.57 लाख करोड़ रुपये और एमएसएमई ऋण 15.6 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
बैंक को उम्मीद है कि वह हाल ही में घोषित ईसीएलजीएस 5.0 योजना के तहत 12,000 करोड़ रुपये से अधिक ऋण देगा।
बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी (एमडी और सीईओ) देवदत्त चांद ने नतीजों के बाद मीडिया से बातचीत में कहा, ‘हमारे एमएसएमई ऋण का आकार लगभग 1,60,000 करोड़ रुपये है, जिसमें से 55-60 प्रतिशत कार्यशील पूंजी है। इसके आधार पर इसका 20 प्रतिशत हिस्सा यानी 12,000 करोड़ रुपये से अधिक हम ईसीएलजीएस की वजह से बांटने की उम्मीद कर रहे हैं।’