प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने आज ऐपल के ऐप स्टोर भुगतान प्रणाली मामले में 5 साल पुरानी जांच में कंपनी से भारत में राजस्व का विवरण मांगा है। यह कदम कंपनी पर वैश्विक टर्नओवर के आधार पर जुर्माना लगाने के बजाय घरेलू राजस्व पर ध्यान केंद्रित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।
यह बदलाव दिल्ली उच्च न्यायालय में इस मामले पर हुई सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत ऐपल के ऐप स्टोर भुगतान प्रणाली में प्रभुत्व के कथित दुरुपयोग से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही है। ऐपल ऐप स्टोर में अपने प्रभुत्व के दुरुपयोग के आरोप पर सीसीआई के वैश्विक टर्नओवर के आधार पर जुर्माना लगाने के नियम को चुनौती दे रही है।
ऐपल ने संकेत दिया कि वह भारत में कंपनी के टर्नओवर के आधार पर जुर्माना लगाने के कदम को भी चुनौती देगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने 15 जुलाई तक ऐपल के खिलाफ सीसीआई को कोई अंतिम आदेश जारी करने पर रोक लगा दी। हालांकि नियामक को अपनी कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी।
घरेलू टर्नओवर पर सीसीआई के नए कदम पर आपत्ति जताते हुए ऐपल ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि अदालत में चल रहे एकाधिकार-रोधी कार्यवाही में दायर किए जाने वाले हलफनामे में इस मुद्दे को शामिल किया जाएगा।
ऐपल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘वैश्विक टर्नओवर और बहु-उत्पाद के लिए अनुरोध लिखित रूप में है जबकि उनके जवाब (सीसीआई के जवाबी हलफनामे) में इसके विपरीत बात कही गई है।’
सीसीआई का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ वकील बलबीर सिंह ने कहा कि नियामक ने अपने आदेश के अनुसार ही जानकारी मांगी थी।
ऐपल ने इस बात पर निराशा व्यक्त की कि सीसीआई अब घरेलू राजस्व के बारे में पूछ रहा है जबकि जुर्माना वैश्विक राजस्व पर आधारित था और कहा कि उसके हलफनामे में ‘यह शामिल होगा’।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायाधीश तेजस कारिया के पीठ ने सीसीआई को जुलाई में अगली सुनवाई तक ऐपल द्वारा कथित प्रतिस्पर्धा-रोधी प्रथाओं की जांच में कोई अंतिम आदेश जारी नहीं करने का निर्देश दिया, साथ ही कंपनी से जांच में सहयोग करने को कहा।
ऐपल को सीसीआई के समक्ष पेश होने और अपने घरेलू राजस्व से संबंधित जानकारी प्रस्तुत करने के लिए और समय देने से इनकार करते हुए पीठ ने नियामक से कहा, ‘15 जुलाई तक अंतिम आदेश न दें। मामले को आगे बढ़ाएं। वे सहयोग करेंगे लेकिन आप अंतिम आदेश पारित नहीं करेंगे।’
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के बयान को दर्ज करते हुए अदालत ने आदेश दिया कि जुलाई के मध्य में मामले की फिर से सुनवाई होने तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा। यह कार्यवाही पिछले साल नवंबर में ऐपल द्वारा प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के संशोधनों और 2024 के मौद्रिक जुर्माना दिशानिर्देशों को चुनौती देने से शुरू हुई है। यह संशोधन भारत-विशिष्ट या उत्पाद-विशिष्ट राजस्व के बजाय वैश्विक राजस्व के आधार पर दंड की गणना की अनुमति देते हैं।
संशोधित प्रावधान सीसीआई को कंपनी के सभी उत्पादों और सेवाओं के वैश्विक राजस्व के 10 फीसदी तक जुर्माना लगाने का अधिकार देता है। पहले भारत में अर्जित राजस्व के आधार पर जुर्माने का प्रावधान था। कानून में कहा गया है कि जुर्माना की गणना करते समय पिछले तीन वित्त वर्ष के औसत राजस्व पर विचार किया जाएगा। ऐपल ने तर्क दिया कि संशोधित ढांचे से उसे लगभग 38 अरब डॉलर के बराबर जुर्माना भरना पड़ सकता है।
सिंघवी ने अदालत को बताया कि सीसीआई ने मामले की अंतिम सुनवाई 21 मई के लिए तय की है जबकि ऐपल की याचिका पर 15 जुलाई को सुनवाई होनी है। सीसीआई के वकील सिंह ने कहा कि कंपनी 2021 से लंबित मामले में कार्यवाही में देरी कर रही थी।
उन्होंने पीठ से कहा, ‘एक बहुराष्ट्रीय कंपनी 2026 में एक नियामक के काम में अड़चन खड़ी कर रही है। ‘नियामक के अनुसार ऐपल को सात बार मोहलत दिए जाने के बावजूद उसने आवश्यक जानकारी नहीं दी जिससे कार्यवाही निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई। सीसीआई ने कहा कि जांच पहले ही पूरी हो चुकी है।